पंढरपुर की श्री विठ्ठल-रुक्मिणी की मूर्ति पर रासायनिक विलेपन करने पर लगी रोक जिला न्यायालय ने निरस्त की ।

सोलापुर – पंढरपुर की श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर समिति एवं पुरातत्त्व विभाग की ओर से २२ एवं २३ जून को ‘स्वयंभू’ श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मूर्ति पर रासायनिक वज्रविलेपन किया जानेवाला था, परंतु वारकरी संप्रदाय एवं महाराष्ट्र मंदिर महासंघ ने पंढरपुर के दिवानी न्यायालय (कनिष्ठ स्तर) में याचिका प्रविष्ट की थी । उस पर निर्णय देते हुए न्यायालय ने रासायनिक विलेपन करने पर रोक लगाई थी । उस पर मंदिर समिति ने इस निर्णय को जिला न्यायालय में चुनौती दी थी । अंततः दोनों पक्षों का कहना सुनकर जिला न्यायालय ने १७ जुलाई को अपना निर्णय देकर यह रोक निरस्त की है ।

वारकरी संप्रदाय, श्री. बाळकृष्ण डिंगरे एवं महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के श्री. पुरुषोत्तम (गणेश) लंके ने पंढरपुर के दिवानी न्यायाधीश (कनिष्ठ स्तर) के न्यायालय में यह अभियोग प्रविष्ट किया था ।

कोल्हापुर के ‘सर्किट बेंच’ में न्याय मांगेंगे – अधिवक्ता सुधीर रानडे

इस संदर्भ में पंढरपुर के न्यायालय में वारकरी संप्रदाय एवं महाराष्ट्र मंदिर महासंघ का पक्ष रखने वाले अधिवक्ता सुधीर रानडे ने कहा, ‘‘न्यायालय ने यह निर्णय देते समय तकनीकी सूत्रों को ध्यान में लेकर यह निर्णय दिया है । इसमें धार्मिक दृष्टिकोण से विचार नहीं हुआ है, इसलिए इस निर्णय के विरोध में हम कोल्हापुर के मुंबई उच्च न्यायालय की ‘सर्किट बेंच’ में (न्यायालय का एक तात्कालिक स्थान, जहां उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एक विशिष्ट अवधि में आकर अभियोग सुनते हैं) न्याय मांगेंगे ।’’