गूगल का ‘जेमिनी’ एआई प्लेटफॉर्म ‘जय श्रीराम’ का उत्तर देता है, तो ‘सिरी’ ऐसा क्यों नहीं कर सकती ? – हिन्दुत्वनिष्ठों का प्रश्न

‘सिरी’ द्वारा ‘जय श्रीराम’ का उत्तर न देने के संबंध में एप्पल कंपनी का अभी तक कोई उत्तर नहीं !

(‘सिरी’ से तात्पर्य ‘ऐप्पल’ कंपनी के भ्रमण भाष की एक सुविधा से है, जिसके माध्यम से विभिन्न कार्य करवाए जा सकते हैं)

नई दिल्ली – कुछ दिन पूर्व मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों ने ‘एप्पल’ कंपनी के ‘आईफोन’ में प्राप्त ‘सिरी’ सुविधा के विरोध में राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अरोप लगाया था । यदि सिरी से ‘जय श्रीराम’ कहा जाता है, तो वह उत्तर में ‘जय श्रीराम’ नहीं कहता; किन्तु यदि किसी ने मुस्लिम अभिवादन ‘सलाम वालेकुम’ कहा तो वह ‘वालेकुम सलाम’ के रूप में उत्तर दे देता है । इस पर हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों ने अप्रसन्नता व्यक्त कर कार्रवाई की मांग की थी । इस प्रकरण पर अभी तक ‘एप्पल’ की ओर से कोई आधिकारिक वक्तव्य नहीं आया है । दूसरी ओर, सूचना-प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि इस पर विवाद करना अयोग्य है । सिरी की कम्प्यूटिंग प्रणाली का निर्माण ऐप्पल ने किया है एवं उसके अनुसार ही वह प्रतिक्रिया देती है । विश्वमें अभिवादन के अनेक रूप होते हैं, इसलिए ऐप्पल जैसी कंपनी से हर प्रकार के अभिवादन का उत्तर देने का प्रोग्राम बनाना असंभव होगा, ऐसा कहा जा रहा है । इसी पृष्ठभूमि में सामाजिक माध्यम पर एक लघुचलचित्र प्रसारित हुआ है जिसमें दिखाया गया कि गूगल का ‘जेमिनी’ ए.आई. प्लेटफॉर्म यदि ‘जय श्रीराम’ या ‘जय महाकाल’ कहा जाए तो वह उसी अनुरूप ‘जय श्रीराम’ एवं ‘जय महाकाल’ कहकर उत्तर देता है । यदि जेमिनी यह कर सकता है तो एप्पल क्यों नहीं ? ऐसा अब पूछा जा रहा है । सामान्य लोग अब ऐप्पल से प्रश्न कर रहे हैं कि भारत से करोडों रुपये का व्यवसाय होने के उपरांत भी उसने अपनी वॉइस असिस्टेंट को भारतीय संस्कृति के अनुसार उन्नत (अपग्रेड) क्यों नहीं किया ?

एप्पल हमारे देवता के नाम का सम्मान नहीं करता !

तीव्रगति से प्रसारित चलचित्र साझा करने वाले का कहना है कि आईफोन हमारी संस्कृति के विरुद्ध कार्यरत कर रहा है एवं करोडों हिन्दुओं की भावनाएं आहत कर रहा है । पूरे देश में करोडों हिन्दू प्रसन्न होकर आईफोन क्रय करते हैं; पर कंपनियां हमारे साथ धोखा कर रही हैं । हमारा पूरा ‘डेटा’ इन कंपनियों के पास है एवं यह हमारे विरुद्ध नियोजित षड्यंत्र है । आज भारत में आईफोन दिखाना एक आधुनिकता का स्वरूप बन चुका है । लोग पैसे न होने पर भी कर्ज लेकर या महंगे किस्तों पर आईफोन क्रय करते हैं । इसके उपरांत भी यह विदेशी कंपनी हमारे देवताओं के नाम का सम्मान नहीं करती ।

धार्मिक नारे सामान्य अभिवादन नहीं होते !

विशेषज्ञों का तर्क है कि सिरी जैसे आभासी सहायक शब्दकोश के आधार पर कार्यरत करते हैं । उनकी प्रणालियों में विश्वभर में प्रचलित कुछ सामान्य अभिवादन जैसे ‘हेलो’, ‘हाय’, ‘सलाम वालेकुम’ एवं कुछ चुनिंदा भाषाओं में ‘नमस्ते’ के लिए हार्ड‑कोडेड उत्तर पहले से प्रोग्राम किए गए होते हैं । ‘सलाम वालेकुम’ को विश्व भर में एक सामान्य अभिवादन माना जाता है । इसके विपरीत ‘जय श्रीराम’ या ‘हर हर महाकाल’ जैसे शब्दों को कंपनियां धार्मिक नारे समझती हैं, सामान्य अभिवादन नहीं । इसलिए सिरी के कोडिंग लिस्ट में ये शब्द समाहित नहीं थे । ‘हर हर महादेव’ या ‘अल्लाह हू अकबर’ जैसे धार्मिक नारे सामान्य अभिवादन सूची में स्थान नहीं पाते ।

प्रौद्योगिकी की विश्वमें हिन्दुओं की भावनाओं की उपेक्षा क्यों होती है ?

हिन्दुत्वनिष्ठों का कहना है कि जब कंपनियां भारत जैसे बडे एवं सांस्कृतिक रूप से समृद्ध देश में व्यापार करती हैं तो उन्हें वहां की वास्तविकताओं को समझना चाहिए । भारत में ‘जय श्रीराम’ या ‘जय श्री महाकाल’ केवल कोई राजनीतिक या धार्मिक नारा नहीं हैं, अपितु करोडों लोगों के दैनिक जीवन में एक‑दूसरे से मिलते समय उपयोग किए जाने वाले सबसे बड़े नमस्कार या अभिवादन हैं । ऐसी परिस्थितियों में यह कहना कि ‘जय श्रीराम’ कोई अभिवादन नहीं है, पूरी तरह अयोग्य एवं वास्तविकता से दूर है । भले ही इसे कोडिंग के संदर्भ में एक ‘मिसिंग वर्ड’ माना जाए, तदापि प्रश्न उठता है कि भारत को सबसे बडी मंडी मानने वाली कंपनी ऐप्पल इतनी उदासीन कैसे हो सकती है ? जब गूगल का जेमिनी एवं अन्य आभासी सहायक इन बातों को समझकर सही उत्तर दे सकते हैं, तो ऐप्पल यहां क्यों असफल रहा ? यदि करोडों भारतीय ग्राहक इन कंपनियों के बहुमूल्य भ्रमणभाष क्रय कर उन्हें अरबों रुपये का व्यवसाय दे रहे हैं तो प्रतिफलस्वरूप वे अपनी संस्कृति एवं आस्था का सम्मान भी चाहते हैं । इसे केवल एक तकनीकी त्रुटि कहकर टाला नहीं जा सकता । ऐप्पल ने अभी तक इस पूरे विवाद पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है । जब तक ऐप्पल इस तकनीकी कमी को सुधारकर अपनी भूमिका स्पष्ट नहीं करता, तब तक भारत के बहुसंख्य समाज में यह असंतोष बना रहेगा एवं यह प्रश्न उठता रहेगा कि प्रौद्योगिकी *के*विश्वमें हिन्दुओं की भावनाओं की उपेक्षा सदैव क्यों होती है ।

संपादकीय भूमिका

जब तक इन वैश्विक कंपनियों के ऐसे उत्पाद हिन्दू धार्मिक भावनाओं का सम्मान नहीं करेंगे, तब तक हिन्दू बहिष्कार का शस्त्र उठाए बिना ये घटनाए चलती रहेंगी, यह ध्यान में रखें !