साधको, ‘द्वेष करना’ इस स्वभावदोष के कारण होनेवाले दुष्परिणाम जानें तथा उसे दूर करने का प्रयास कर साधना का आनंद प्राप्त करें
‘द्वेष करना’, यह स्वभावदोष क्यों उत्पन्न होता है ? उसका प्रकटीकरण कैसे होता है ? तथा यह स्वभावदोष दूर करने हेतु क्या प्रयास करने चाहिए ?’, इसका ईश्वर ने मुझसे जो चिंतन करवाया, उसे आगे दिया है ।