सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
‘हिन्दू राष्ट्र का ध्वज सत्त्व-रज प्रधान भगवा होगा । वह अनेक युगों से भारत का ध्वज है । अर्जुन, छत्रपति शिवाजी महाराज इत्यादि का भी वही ध्वज था ।’
‘हिन्दू राष्ट्र का ध्वज सत्त्व-रज प्रधान भगवा होगा । वह अनेक युगों से भारत का ध्वज है । अर्जुन, छत्रपति शिवाजी महाराज इत्यादि का भी वही ध्वज था ।’
भारत को ‘बांग्लादेशी घुसपैठिए’ मुक्त करने की मांग को लेकर पुणे में निकाले गए भव्य मोर्चा में हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति ने व्यक्त किया निर्धार !
ओम बिरला ने कहा कि धर्म, आध्यात्मिकता और संस्कृति का यह महाकुंभ दिव्य है । इसमें एक अलौकिक ऊर्जा है । मैं मां गंगा से प्रार्थना करता हूं कि उनका आशीर्वाद सदा हम सभी पर बना रहे ।
सेक्टर ९ में शांभवी पीठ की काली सेना के शिविर में इस अधिवेशन का आयोजन किया गया था ।
विश्वविद्यालय के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के विषय में व्यक्त किए गौरवोद्गार !
महाकुम्भ क्षेत्र में हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. पिंगळेजी तथा समिति के अन्य कार्यकर्ताओं ने विविध अखाडों के संत-महंतों से भेंट कर उन्हें जून में गोवा में होनेवाले वैश्विक हिन्दू राष्ट्र महोत्सव का निमंत्रण दिया । तथा हिन्दू जनजागृति समिति के कार्य की विस्तृत जानकारी दी ।
अखिल भारतीय अखाडा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराजजी से भेंट करने पर उन्होंने कहा, ‘‘प्रयागराज का भव्य महाकुम्भ, अयोध्या का श्रीराम मंदिर, वाराणसी का श्री काशी विश्वेश्वर मंदिर तथा उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर देखकर लगता है कि ये सब परिवर्तन ‘हिन्दू राष्ट्र’ के ही संकेत दे रहे हैं । “
पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वतीजी की ओर से पूरे कुंभ मेले में विभिन्न स्थानों पर ‘हम भारत भव्य बनायेंगे, हम हिन्दू राष्ट्र बनायेंगे’ के बैनर लगाए गए थे ।
दिनांक १ फरवरी से ९ फरवरी २०२५ के बीच भारत मंडपम् में आयोजित विश्व पुस्तक मेले में सनातन संस्था द्वारा आध्यात्मिक ग्रंथों की प्रदर्शनी लगाई गई । पुस्तकों के इस महाकुम्भ का उद्घाटन भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा किया गया ।
इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिक (सेवानिवृत्त) डॉ. नलिनी एवं वैज्ञानिक (सेवानिवृत्त) डॉ. सतीश ने महाकुंभक्षेत्र में लगाए गए महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय के कक्ष से भेंट की । प्रदर्शनी देखने के उपरांत उन्हें अत्यधिक आनंद हुआ ।