
‘एक बार मैंने एक लेख में पढा कि किसी आर्थिक अथवा शारीरिक बलवान व्यक्ति ने बलहीन व्यक्ति के साथ अन्याय किया, तो बलहीन व्यक्ति उसका विरोध नहीं कर सकता । ऐसी स्थिति में बलहीन व्यक्ति को बहुत चिडचिडाहट होती है । उसके मन में ‘उस बलवान व्यक्ति को मारना चाहिए’ जैसे अनुचित विचार आकर उसे तनाव आता है । शोधकर्ताओं ने इस समस्या के लिए एक प्रयोग किया । उस प्रयोग में बलहीन व्यक्ति को बलवान व्यक्ति की अनुपस्थिति में ऊंची आवाज में गालियां देने के लिए कहा गया । उसके उपरांत गालीगलोच करनेवाले बलहीन व्यक्ति का चिकित्सकीय परीक्षण किया गया । उस समय उसका रक्तचाप एवं तनाव अल्प हुआ दिखाई दिया । इस प्रयोग के विषय में शोधकर्ताओं ने कहा था, ‘हमारे मन का तनाव एवं चिडचिडाहट अल्प करने के लिए ‘गालियां देना’ एक अच्छा मार्ग है ।’
एक बार मैंने इस प्रयोग के विषय में प.पू. गुरुदेवजी (सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी) को बताया । उस समय उन्होंने कहा, ‘‘तामसिक वृत्तिवाले शोधकर्ताओं ने यह प्रयोग किया है, जो उचित नहीं है । तनाव दूर करने के लिए आप नामजप तथा आध्यात्मिक स्तर के उपाय कर सकते हैं ।’’
– डॉ. दीपक जोशी (बैचलर ऑफ नैचरोपैथी एंड योगिक साइन्स) देवद, पनवेल. (२१.०२.२०२५)
(और इनकी सुनिए…) ‘कुंकुम इस्लामी देशों से आता है, तो क्या फिर हिन्दु तिलक लगाना बंद कर देंगे ?’ – Priyank Kharge
साधको, वर्तमान आपातकाल में रात्रि के समय व्यक्तिगत वाहन से लंबी दूरी की यात्रा करने से बचें तथा अपरिहार्य परिस्थिति में ही आध्यात्मिक स्तर के उपाय करके रात्रि-यात्रा करें !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
Dhaka Hindu Protest : ढाका में हिन्दुओं ने निकाला विशाल मशाल जुलूस !
छोटे बच्चों को गोमांस देने का परामर्श का प्रकरण !
संपादकीय : नागरिक शास्त्र केवल पुस्तक में ?