| स्वामी निर्गुणानंद ब्रह्मगिरी महाराजजी ने इस समय बताया कि गुरुदेवजी (सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी) को मेरा प्रणाम कहिए । मेरे गुरुदेवजी (श्रीमत देबानंद ब्रह्मचारी महाराजजी) और उनका बडा स्नेह है । |

कोलकाता (बंगाल) – सनातन संस्था की ओर से १७ से १९ मई २०२५ की अवधि में फोंडा, गोवा में संपन्न ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ के उपरांत कुछ कारणों से जो संत एवं मान्यवर महोत्सव में सहभागी नहीं हो सके थे, उन्हें महोत्सव में हुए महाधन्वंतरि यज्ञ का प्रसाद, ‘सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी का संक्षिप्त चरित्र’ ग्रंथ भेंट देने के लिए हिन्दू जनजगृति समिति के पूर्व एवं पूर्वोत्तर भारत राज्य संगठक श्री. शंभू गवारे ने संपर्क कर संतों के आशीर्वचन प्राप्त किए एवं मान्यवरों से भेंट की ।

इसमें बंगाल में मेघालय एवं त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल तथा प्रसिद्ध लेखक श्री. तथागत रॉय, आदित्य वाहिनी, पश्चिम बंगाल के अध्यक्ष डॉ. देबशीष गोस्वामी, ट्रुथ (इंग्लिश वीकली) के उप संपादक एवं शास्त्र धर्म प्रचार सभा, पश्चिम बंगाल के साधक डॉ. कौशिकचंद्र मल्लिक, इंटरनेशनल वेदांत सोसाइटी के कोलकाता शाखा के सचिव स्वामी निर्गुणानंद पूरीजी, भारत सेवाश्रम संघ के महासचिव स्वामी विश्वात्मानंदजी (दिलीप महाराजजी), विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय एवं पश्चिम बंगाल मार्गदर्शक तथा रिषडा प्रेम मंदिर, बंगाल के सचिव स्वामी निर्गुणानंद ब्रह्मगिरी महाराजजी को भेंट दी ।

साथ ही झारखंड राज्य में धनबाद के प्रसिद्ध कथाकार स्वामी लोचन महाराजजी, बाबा बैद्यनाथजी की नगरी देवघर में रामकृष्ण विवेकानंद सेवाश्रम के संस्थापक स्वामी उदय महाराजजी (राधाकांतानंद महाराजजी) को सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव में हुए महाधन्वंतरि यज्ञ का प्रसाद एवं ‘सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी का संक्षिप्त परिचय’ ग्रंथ भेंट में दिया गया ।
प्रसाद मिलने के उपरांत उदय महाराजजी ने कहा, ‘‘मुझे शंखनाद महोत्सव में आने की बहुत इच्छा थी । कुछ परिस्थितियों के कारण संभव नहीं हुआ; परंतु वीडियो देखकर आनंद लगा ।’’
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?