‘आई.एम.ए.’ की फोंडा शाखा की ओर से डॉ. पांडुरंग मराठे को किया गया सम्मानित !

(बाएं से) डॉ. अजय पेडणेकर, सम्मानित करते हुए डॉ. दत्ताराम देसाई, स्मृतिचिन्ह स्वीकार करते हुए डॉ. पांडुरंग मराठे एवं साथ में डॉ. सुभाष शिकेरकर

फोंडा – ‘इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आई.एम.ए.) फोंडा शाखा’ की ओर से ‘डॉक्टर्स डे’ के उपलक्ष्य में ३ डॉक्टरों को सम्मानित किया गया । इसमें सनातन के साधक डॉ. पांडुरंग मराठे, साथ ही डॉ. गजानन नाइक एवं सूरज काणेकर का समावेश था । ‘आई.एम.ए. गोवा’ के अध्यक्ष डॉ. दत्ताराम देसाई के हस्तों इन सभी को सम्मानित किया गया ।

‘डॉक्टर्स डे’ के उपलक्ष्य में ‘दिलासा पेलिएटिव’ केंद्र में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया । इस कार्यक्रम में ‘आई.एम.ए.’की फोंडा शाखा के अध्यक्ष डॉ. अजय पेडणेकर, आई.एम.ए. फोंडा चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. संतोष उसगांवकर, उपाध्यक्ष डॉ. सुभाष शिकेरकर, अन्य पदाधिकारी तथा अनेक डॉक्टर उपस्थित थे ।

डॉ. पांडुरंग मराठे

चिकित्सकीय क्षेत्र में विगत ४० वर्ष निःस्वार्थ भाव से, निरपेक्षता से तथा समर्पित भाव से सेवा करने के लिए डॉ. पांडुरंग मराठे को शॉल, श्रीफल, प्रमाणपत्र एवं स्मृतिचिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया । डॉ. पांडुरंग मराठे ने उनके चिकित्सकीय जीवन में आरंभिक ११ वर्ष सरकारी चिकित्सालयों में सेवाएं दीं । उसके उपरांत अध्यात्मप्रसार करनेवाली सनातन संस्था के संपर्क में आने के उपरांत विगत २० वर्षाें में उन्होंने सनातन संस्था की ओर से सहस्रों गरीब रोगियों को निःशुल्क चिकित्सकीय सेवाएं दीं । उससे पूर्व उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकीय सेवाएं दी थीं । इन सभी सेवाओं का संज्ञान लेकर उन्हें सम्मानित किया गया । उसी प्रकार कुछ समय तक डॉ. सूरज काणेकर भी योगगुरु बाबा रामदेव की पतंजलि योग समिति के गोवा प्रमुख थे । वे अभी भी योगासन के वर्ग लेकर समाज को योगासनों का महत्त्व समझाते हैं ।

विभिन्न परिक्षाओं में सफलता प्राप्त छात्रों तथा पैरिस के ‘पैरा ऑलिंपिक’ (दिव्यांग बच्चों की खेल प्रतियोगिता) में भारत का प्रतिनिधित्व करनेवाली तथा दृष्टिदोष से ग्रसित कु. साक्षी ईश्वर काळे को भी इस कार्यक्रम में सम्मानित किया गया ।

डॉ. पांडुरंग मराठे इन्हे प्राप्त प्रमाणपत्र एवं स्मृतिचिन्ह

डॉ. पांडुरंग मराठे द्वारा व्यक्त की गई कृतज्ञता !

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी

मेरे डॉक्टर बनने में जिन-जिन लोगों ने, शिक्षकों ने तथा वैद्यों ने सहायता की तथा जो अभी भी मेरी सहायता कर रहे हैं, उनके प्रति डॉ. पांडुरंग मराठे ने कृतज्ञता व्यक्त की । केवल डॉक्टर नहीं, अपितु अच्छा डॉक्टर बनने के लिए, साथ ही आनंदमय जीवन जीने के लिए जिनसे मार्गदर्शन मिल रहा है, उसके लिए उन्होंने अपने गुरु सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कृतज्ञता व्यक्त की ।