Plea Against Places Of Worship Act : मोहम्मद बिन कासिम के आक्रमणों से पूर्व मंदिरों की जो स्थिति थी, वह यथावत होनी चाहिए !
तत्कालिन कांग्रेस सरकार ने संसद में पूजा स्थल कानून पारित किया है । उसे संसद के द्वारा ही रद्द किया जाना आवश्यक है ।
तत्कालिन कांग्रेस सरकार ने संसद में पूजा स्थल कानून पारित किया है । उसे संसद के द्वारा ही रद्द किया जाना आवश्यक है ।
देश के हर स्थान पर ऐसे त्वरित सर्वेक्षण करके उसकी रिपोर्ट जनता के सामने रखी जाए तो विश्व को वास्तविक स्थिति समझ में आएगी और हिंदुओं पर हुए आक्रमणों का इतिहास उजागर होगा।
६ वें शतक तक भारत प्रत्येक क्षेत्र में आगे था, इस पर विश्व का विश्वास है । हमने अनेक बातों का संशोधन किया है; परंतु पश्चात हम रूक गए तथा तदुपरांत अपनी अवनति को आरंभ हुआ
ज्ञानवापी परिसर में १६ मई २०२२ को शिवलिंग प्राप्त हुआ था । ज्ञानवापी परिसर चिल्ला कर कह रहा है कि यह हिन्दुओं का परिसर है । ज्ञानवापी परिसर में बलपूर्वक नमाजपठन किया जा रहा था । यह अत्यंत चूक है ।
पुरातत्त्व विभाग के दावे के कारण नागपंचमी के दिन पूजा-अर्चना की मांगी गई अनुमति जिलाधिकारी ने अस्वीकार की !
भोजशाला में दीवारों और खंभों के साथ-साथ 37 देवी-देवताओं की मूर्तियां भी मिलीं। कुल 1 सहस्त्र 700 अवशेष मिले है। इनमें 650 अवशेष सबसे महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री मोदीजी ने कहा, ‘तीसरी बार शपथ लेने के उपरांत प्रथम दस दिनों के अंदर ही मुझे नालंदा आने का अवसर प्राप्त हुआ है । यह मेरा सौभाग्य है ।
सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन का दो टूक बयान !
सुप्रसिद्ध लेखक विक्रम संपत की पुस्तक ‘प्रतीक्षा शिवाची: काशी-ज्ञानवापी के सत्य की खोज’ का प्रकाशन !
उत्तर प्रदेश के आगरा का विश्वविख्यात ताजमहल मूलतः हिन्दुओं का ‘तेजोमहालय’ नामक मंदिर है । अब आगरा से ३५ किमी दूरी पर स्थित फतेहपुर सीकरी का प्रकरण सामने आया है । वहां का शेख सलीम चिश्ती दरगाह मूलतः मां कामाख्या देवी का मंदिर है, ऐसा दावा एक याचिका के माध्यम से आगरा के स्थानीय न्यायालय में किया गया है ।
हिन्दू धर्मग्रंथ में ५० फुट लंबाई के वासुकी नाग के संदर्भ में एक प्रसंग का वर्णन किया गया है । इस नाग का उपयोग देव एवं दानव के सामूहिक समुद्रमंथन में डोरी के रूप में किया गया था। भगवान शिव ने वासुकी को अपने गले में धारण किया था।