
गुरुग्राम (हरियाना) – यहां आयोजित ‘विजन फॉर डेवलप्ड इंडिया २०२४’ परिषद के उद्घाटन के समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत ने ऐसा वक्तव्य दिया कि आज अनेक लोग संशोधन कर रहे हैं । परंतु लालफीता के कारण वे कुछ भी नहीं कर सकते । आजकल सबका उद्देश्य पेट भरना ही है । यह देख कर बहुत दुख होता है ।
सरसंघचालक ने आगे कहा कि १६ वें शतक तक भारत प्रत्येक क्षेत्र में आगे था, इस पर विश्व का विश्वास है । हमने अनेक बातों का संशोधन किया है; परंतु पश्चात हम रूक गए तथा तदुपरांत अपनी अवनति को आरंभ हुआ । आज समय विकसित भारत की मांग कर रहा है । विश्व में ४ प्रतिशत जनसंख्या ऐसी है, जिसको ८० प्रतिशत सुविधाओं की आवश्यकता है । सर्वसमावेशकता भारत की विशेषता है । प्रत्येक भारतीय स्वयं का विकसित तथा सक्षम भारत चाहता है । गत २ सहस्र वर्षो में विकास के अनेक प्रयोग हुए । तंत्रज्ञान आना चाहिए; परंतु क्रूरता नहीं होनी चाहिए । प्रत्येक हाथ को काम मिलना चाहिए । ये सभी बातें साथ में लेकर कैसे चलेंगे ?, विश्व को हमसे यह सीखना चाहिए । केवल अनुकरण करने समान बातें ही लें; परंतु अंधेपन से अनुकरण न करें ।
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