आगरा (उत्तर प्रदेश) के न्यायालय में प्रविष्ट याचिका द्वारा दावा !

आगरा (उत्तर प्रदेश) – उत्तर प्रदेश के आगरा का विश्वविख्यात ताजमहल मूलतः हिन्दुओं का ‘तेजोमहालय’ नामक मंदिर है । अब आगरा से ३५ किमी दूरी पर स्थित फतेहपुर सीकरी का प्रकरण सामने आया है । वहां का शेख सलीम चिश्ती दरगाह मूलतः मां कामाख्या देवी का मंदिर है, ऐसा दावा एक याचिका के माध्यम से आगरा के स्थानीय न्यायालय में किया गया है । न्यायालय ने इस याचिका का संज्ञान लेकर नोटीस भेजने के आदेश दिए हैं । ९ मई को अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने न्यायालय में यह दावा प्रविष्ट (दाखिल) किया ।
📍 Fatehpur Sikri, Agra
Dargah or a Hindu Temple ?
Another movement to revive the Hindu ethos now?
Is Saleem Chishti Dargah the original Maa Kamakhya temple?
Adv. Ajay Pratap Singh has filed a petition in the Agra court to this effect!
The advocate says a claim petition was… pic.twitter.com/J59mgkdI2y
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) May 11, 2024
याचिका में माता कामाख्या अस्थान, आर्य संस्कृति संरक्षणम् ट्रस्ट, योगेश्वर श्री कृष्ण कल्चरल रिसर्च ट्रस्ट, क्षत्रिय शक्तिपीठ विकास ट्रस्ट और अधिवक्ता अजय प्रताप वादी बन गए हैं । इस मामले में उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, व्यवस्थापन समिति दरगाह सलीम चिश्ती और व्यवस्थापन समिति जामा मस्जिद को प्रतिवादी बनाया गया है ।
देवी के मंदिर के ऐतिहासिक दस्तावेज !

अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि,
१. सलीम चिश्ती दरगाह के संदर्भ में परिवाद किया गया है । फतेहपुर सीकरी दरगाह मां कामाख्या देवी का मूल गर्भगृह है और जामा मस्जिद परिसर मूल मंदिर का परिसर है । सीकरवारों की कुलदेवी मां कामाख्या देवी का मंदिर यहीं पर होता था । रावधम देव खानवा के युद्ध के समय वहां के राजा थे । उनके इतिहास में इसका उल्लेख पाया जाता है ।
२. ‘बाबरनामा’ में फतेहपुर सीकरी के बुलंद दरवाजे की नैऋत्य दिशा में एक अष्टकोना कुंआ है और पश्चिम-पूर्व में एक गरीब घर है । बाबर ने ‘बाबरनामा’ में उसके निर्माण का उल्लेख किया है । अष्टकोना कुंआ, एक हिन्दू वास्तुकला है ।
(सौजन्य : The Big Faces)
३. विदेशी इतिहासकार ई.व्ही. हॅवेल ने उनकी पुस्तक में लिखा है कि जामा मस्जिद का छत और खंबे शुद्ध हिन्दू कलाकृतियां (डिजाइन) हैं ।
४. ‘भारतीय पुरातत्व विभाग’ आगरा के भूतपूर्व अधीक्षक डॉ. डी.व्ही. शर्मा ने वीर छावेली टिले के लिए इस क्षेत्र में उत्खनन किया था । उत्खनन के समय उन्हें सरस्वती और जैन शिल्पों की मूर्तियां मिली । इसके आधार पर डॉ. शर्मा ने ‘फतेहपुर सीकरी न्यू डिस्कवरी’ का ‘पुरातत्व’ नामक पुस्तक लिखा । जामा मस्जिद हिन्दू स्तंभों पर बनाई है, ऐसा पुस्तक के पृष्ठ क्रमांक ८६ पर स्पष्टरूप से लिखा है ।
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