Teesta River Project : बांग्लादेश ने भारत के बजाय चीन को दिया ९ हजार करोड रुपये का तीस्ता नदी परियोजना ।

तीस्ता नदी

ढाका (बांग्लादेश) – देश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने तीस्ता नदी परियोजना में भारत के निवेश प्रस्ताव को अस्वीकार कर इसे चीन को सौंप दिया है । चीन लगभग ९ सहस्त्र करोड रुपये की ‘तीस्ता रिवर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट’ में से ७ सहस्त्र करोड रुपये ऋण के रूप में देगा, जिसे बांग्लादेश को ५० वर्षों में चुकाना होगा । वर्ष २०२४ में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार को भारत ने चीन को दूर रखने के उद्देश्य से ९ हजार करोड रुपये का प्रस्ताव दिया था, लेकिन शेख हसीना सरकार के पतन के कारण इस पर निर्णय नहीं हो सका ।

सिलिगुडी कॉरिडोर से केवल २२ किलोमीटर दूर रहेगा चीन ।

४१४ किलोमीटर लंबी तीस्ता नदी हिमालय से निकलकर सिक्किम, पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है । वर्ष २०११ के प्रस्तावित जल समझौते के अनुसार ३७.५ प्रतिशत पानी बांग्लादेश को मिलना था, परन्तु पश्चिम बंगाल के विरोध के कारण यह समझौता नहीं हो सका । परियोजना का क्षेत्र भारत की सीमा से केवल १० से १२ किलोमीटर तथा सिलिगुडी कॉरिडोर (चिकन नेक) से २२ किलोमीटर दूर है । ‘चिकन नेक’ पश्चिम बंगाल में स्थित लगभग २२ किलोमीटर चौडा अत्यंत संकरा भूभाग है, जो पूर्वोत्तर के सात राज्यों को शेष भारत से जोडने वाला एकमात्र स्थलीय मार्ग है।

यह परियोजना पावर चाइना नामक संस्था द्वारा बनाई जाएगी । सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल एक व्यावसायिक कंपनी नहीं, बल्कि चीन की सरकार तथा उसकी सेना से गहराई से जुडी हुई संस्था है । इस परियोजना के कारण सैकडों चीनी इंजीनियर एवं तकनीकी विशेषज्ञ लंबे समय तक भारत की पूर्वोत्तर सीमा के निकट रहेंगे, जिसे भारत की सुरक्षा के लिए एक बडी चुनौती माना जा रहा है ।

बांग्लादेश को लडाकू विमान देने पर भी चीन से चर्चा ।

सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री तारिक रहमान के रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल शमशुल इस्लाम ने हाल ही में चीन के राजदूत से भेंट की । इस बैठक में बांग्लादेश को चीन द्वारा लडाकू विमान उपलब्ध कराने के विषय पर भी चर्चा हुई ।

संपादकीय भूमिका

बांग्लादेश भारत को पहले अमेरिका तथा अब चीन के माध्यम से घेरने का प्रयास कर रहा है , जबकि भारत निष्क्रिय बना हुआ है — ऐसा चित्र जनता के सामने दिखाई दे रहा है ।