सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के ओजस्वी विचार
‘बुद्धिप्रमाणवादियो में जिज्ञासा न होने से, उन्हें जितना ज्ञान है, उतने तक ही वे स्वयं को सीमित रखते हैं । उन्हें आगे की सूक्ष्म या उच्च बातों का ज्ञान नहीं हो पाता ।’
‘बुद्धिप्रमाणवादियो में जिज्ञासा न होने से, उन्हें जितना ज्ञान है, उतने तक ही वे स्वयं को सीमित रखते हैं । उन्हें आगे की सूक्ष्म या उच्च बातों का ज्ञान नहीं हो पाता ।’
हे वीर हनुमानजी, रामराज्य स्थापित करने हेतु हम हिन्दुओं को शक्ति दो, ऐसी आपके चरणों में आर्त प्रार्थना है !
यही भूमिका सरकार ने इस आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश देने का निर्णय लेते समय क्यों नहीं अपनाई ? इससे यही सिद्ध होता है कि ‘साम्यवादी केरल सरकार हिन्दुओं की प्रथा-परंपराओं को ध्वस्त करना चाहती है’ !*
छत्तीसगढ़ विधानसभा में ‘धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक, २०२६’ सम्मत हुआ । इसके साथ ही अब कठोर प्रावधानों वाला धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने वाला छत्तीसगढ़ भारत का १० वां राज्य बन गया है ।
छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित हिन्दवी स्वराज के लिए जिस प्रकार उनके सैनिकों तथा सेनापतियों द्वारा किया गया त्याग सर्वोच्च है, उस प्रकार आज भी अनेक हिन्दुत्वनिष्ठ तथा राष्ट्रप्रेमी नागरिक हिन्दू धर्म एवं राष्ट्र की रक्षा हेतु ‘सैनिक’ के रूप में कार्य कर रहे हैं ।
आधुनिक युद्ध का परिवर्तित स्वरूप देखते हुए रणनीति में परिवर्तन करना, कालानुसार भारत के लिए आवश्यक !
चंद्रपुर (महाराष्ट्र) में ‘विश्व महिला दिवस’ के उपलक्ष्य में ‘गायत्री परिवार’ की ओर से उल्लेखनीय धर्मकार्य करने के लिए यहां की सनातन की साधिका श्रीमती मंगला दरवे एवं श्रीमती दीपाली सिंगाभट्टी को सम्मानित किया गया
हिंदू जनजागृति समिति एवं सनातन संस्था की ओर से हिन्दू नववर्ष पारंपरिक पद्धति से तथा बडे उत्साह के साथ मनाया गया ।
भारत में पिछले कई वर्षों से मंदिरों में इस प्रकार की भगदड की घटनाएं होती रही हैं, परंतु उन पर स्थायी नियंत्रण के लिए सरकार, पुलिस, प्रशासन एवं मंदिर प्रबंधन की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं, यह एक गंभीर सत्य है !
इस समय हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी ने उपस्थित जिज्ञासुओं का सुंदरकांड के आध्यात्मिक व व्यावहारिक पक्ष पर अमूल्य मार्गदर्शन किया ।