
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने मैथ्यू एरॉन वैंडाइक (आयु २४ वर्ष) नामक अमेरिका के नागरिक के साथ यूक्रेन के ६ नागरिकों को बंदी बनाया है । उन्हें ११ दिनों की न्यायालयीन कोठरी मे भेजा गया है । उनपर गैरकानूनी गतिविधियां करना, सीमाभंग, ड्रोन प्रणाली द्वारा युद्ध प्रशिक्षण और पूर्वाेत्तर भारत एवं म्यांमार के संबंधित सशस्त्र गुटों से संपर्क रखने के गंभीर आरोप हैं । इन्हें कोलकाता, लक्ष्मणपुरी और देहली हवाईअड्डों पर बंदी बनाया गया । उनके नाम हैं – पेट्रो हुर्बा, तारास स्लीवियाक, इवान सुकमानोव्स्की, मारियन स्टेफानकिव, मॅक्सिम होनचारूक और विक्टर कामिन्स्की । ये सभी विदेशी नागरिक पर्यटन के पारपत्र द्वारा भारत में आए हैं । प्रतिबंधित क्षेत्र की अनुमति लिए बिना ही उन्होंने भारत के मिजोरम में प्रवेश किया । तत्पश्चात वे गैरकानूनी रूप से म्यांमार में घुसे । इस घुसपैठ से लगता है कि वे पूर्वाेत्तर भारत के सशस्त्र गुटों के भी संपर्क में हैं । उनका उद्देश्य था – ‘शस्त्रों की आपूर्ति के साथ आतंकवादियों को प्रशिक्षित करना’ । यूरोप से लाए ‘ड्रोन’ का उपयोग भी वे करनेवाले थे । म्यांमार के प्रशिक्षण शिविरों की सहायता करने के उद्देश्य से उन्होंने शस्त्रों की आपूर्ति करने के साथ ही आतंकवादियों को प्रशिक्षित करने की योजना बनाई थी । मुख्यत: ड्रोन युद्धप्रणाली, ड्रोन के संचालन और संयोजन पर आधारित उनकी यह योजना थी । ‘विदेश से आए हैं, इसलिए वे ‘अतिथि’ हैं’, इस भावना से कोई उनकी ओर न देखें । ऐसे विदेशियों की ओर मानवतावादी दृष्टिकोण से देखना उचित नहीं होगा । उनकी घुसपैठ भारत की अंतर्गत सुरक्षा को प्रभावित करनेवाली है । इससे ध्यान में आता है कि ‘भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा दिन-प्रतिदिन संवेदनक्षम होती जा रही है ।’ इससे कुछ प्रश्न निर्माण होते हैं, जैसे कि ‘बिना किसी अनुमति के कोई भी भारत की सीमाएं कैसे पार कर सकता है ? क्या भारत की सीमाएं सुरक्षित हैं ? विदेशी नागरिकों की गतिविधियों पर कितना नियंत्रण रखा जाता है ? आरोपियों के नियोजन में ‘ड्रोन’ समाविष्ट होते हुए देखकर लगता है कि क्या आधुनिक प्रणालियों का उपयोग कर ‘ड्रोन युद्ध’ जैसे नए संकट का सामना करने के लिए भारत तैयार है ?’ ड्रोन के उपयोग से युद्ध का स्वरूप बदलता जा रहा है । पारंपरिक अस्त्र-शस्त्रों की अपेक्षा ड्रोन, सायबर आक्रमण और कृत्रिम बुद्धि पर आधारित प्रणालियों का उपयोग कर युद्ध किया जा रहा है । शस्त्रास्त्रों की सहायता से लडना सैनिकी कुशलता थी; परंतु वर्तमान प्रगत प्रणालियों से लडना हानिकारक होता जा रहा है । इसलिए ऐसे प्रशिक्षणों के कारण भारत केवल नष्ट ही हो सकता है । आतंकवादियों का भी यही उद्देश्य है । केवल २४ वर्ष का अमेरिका का नागरिक मैथ्यू एरॉन वैंडाइक आज तक की अनेक अंतरराष्ट्रीय कार्यवाहियों में सहभागी था, उदा. लिबिया का गृहयुद्ध, सीरिया-इराक में हुई गतिविधियां, वेनेजुएला का विद्रोह और तत्पश्चात का यूक्रेन संघर्ष इत्यादि । रूस के विरुद्ध युद्ध में उसने यूक्रेन के सैनिकों को प्रशिक्षित किया था । ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ नामक उसकी संस्था द्वारा वह विविध गुटों को प्रशिक्षित करता है । युवावस्था में उसके इन कृत्यों को देखकर लगता है कि वह कट्टर है । ऐसे व्यक्तियों का भारत में प्रवेश संदेहजनक ही नहीं; देश के बनाते ?’, इसपर भी विचार होना चाहिए ।
भारत को अस्थिर करने का षड्यंत्र !
देशांतर्गत कलह तो रहते ही हैं; परंतु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही राजनीति का भी भारत पर अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव पड रहा है । इस प्रकरण को देखकर लगता है कि विदेशी नागरिक भारत की भूमि का सीधा उपयोग कर म्यांमार के गुटों की सहायता कर रहे होंगे, जिसका प्रभाव भारत पर निश्चित ही पडेगा । इसमें भारत की हानि होगी । भारत को सावधान और सतर्क रहना चाहिए । पूर्वाेत्तर राज्यों में पहले से ही बहुसंख्यक हिन्दू बडी मात्रा में अल्पसंख्यक होते जा रहे हैं । आगामी कुछ वर्षाें में बहुत ही कम हिन्दू वहां शेष रहेंगे । अल्पसंख्यक अन्य धर्मीय बहुसंख्यक हो जाने से ये सभी राज्य नष्ट होने के मार्ग पर हैं । इसी का अपलाभ ऐसे राष्ट्रविघातक तत्त्वों द्वारा उठाया जाता है । ये तत्त्व राज्य के स्थानीय लोगों से हाथ मिलाकर खुले आम घुसपैठ कर उनका षड्यंत्र साध्य करते हैं । उनकी गतिविधियों पर नियंत्रण लाने के लिए सबसे पहले राज्यांतर्गत पृथकतावादी अथवा राष्ट्रद्वेषी स्थाानीय लोगों का शोध लेना पडेगा; क्योंकि बिना उनकी सहायता के इन विदेशियों को भारत में कदम रखना असंभव होता है । भारत के ही घटक यदि इस प्रकार के तंत्रों से जुडे होंगे, तो वह देश के लिए हानिप्रद सिद्ध होगा । इसलिए इस बाह्य शृंखला को खंडित करने के लिए इस शृंखला की जड कहां तक पहुंची है, यह ढूंढना होगा । पूर्वाेत्तर राज्यों में अस्थिरता उत्पन्न कर संपूर्ण भारत को अस्थिर करने का बडा षड्यंत्र रचा जा रहा है, यही इन घटनाओं से लगता है । इसमें अमेरिका की केंद्रीय गुप्तचर एजेंसी (सी.आई.ए.) तो सम्मिलित नहीं हैन ? इसका भी अन्वेषण होना चाहिए । यूक्रेन केनागरिकोंका इसमें सम्मिलित होना दिखाता हैकि यूक्रेन भी भारतद्वेष करनेतथा उसका प्रसार करनेमें उलझा हुआ है। इससेसंकट की कल्पना करना संभव होगा । यह स्थिति भारत-यूक्रेन तथा भारत-अमेरिका के संबंधोंपर भी परिणाम करनेवाली होसकती है। यूक्रेन ने उसके नागरिकोंको मुक्त करनेकेलिए प्रयत्न आरंभ किए हैं, साथ ही अमेरिका ने भी सतर्क भूमिका अपनाई है। ‘७ लोगोंको बंदी बनानेसे सभी मछलियां हाथ में आई’, ऐसा नहीं कह सकते। उनकी अंतर्गत शृंखला, अन्य आरोपी और सूत्रधारोंका पता लगाना भी अत्यावश्यक है।
भारत को रणनीति में परिवर्तन करना चाहिए !
धर्मांतरण के संकट में झुलसनेवाले ईशान्य भारत में अब विदेशी आतंकवादियों की कार्यवाहियां होना पूर्वाेत्तर भारत को आग लगाने जैसा ही है । विदेशी आतंकवादियों का सामना करने के लिए भारत को कठोर विदेशनीति भी अपनानी पडेगी । ऐसे लोगों की गतिविधियों पर ध्यान रखना, सीमा सुरक्षा अभेद्य करना, ड्रोन प्रणाली पर नियंत्रण और निगरानी रखना, पूर्वाेत्तर भारत के सुरक्षा तंत्र सुदृढ करना, अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढाना, इस दृष्टि से देश को कदम बढाने होंगे । राष्ट्रीय जांच एजेंसियों की कार्यवाहियों ने भारत को समय पर जगा दिया है । इसे सतर्कता की चेतावनी ही कहना होगा ! आधुनिक युद्ध का परिवर्तित होता स्वरूप देखते हुए भारत को भी उसकी रणनीति में परिवर्तन करना, समय की मांग है । इसी में राष्ट्र का हित है ।
| आधुनिक युद्ध का परिवर्तित स्वरूप देखते हुए रणनीति में परिवर्तन करना, कालानुसार भारत के लिए आवश्यक ! |

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