सर्वस्व का त्याग ही हिन्दू राष्ट्र स्थापना की नींव है !

इस वर्ष हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन की तपपूर्ति (१२ वर्ष) हो रही है।रामराज्यरूपी धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्र प्रत्यक्ष साकार होने के लिए स्वक्षमता के अनुसार तन-मन-धन एवं समय आने पर सर्वस्व का त्याग करने  अर्थात सर्वोच्च योगदान देने की आवश्यकता है। यह ध्यान में रखकर धर्मसंस्थापना का महान कार्य कीजिए !

‘जयतु जयतु हिन्‍दुराष्‍ट्रम्’ के उद्घोष में वैश्विक हिन्दू राष्‍ट्र महोत्‍सव का  प्रारंभ !

‘जयतु जयतु हिन्‍दुराष्‍ट्रम्’ के उत्‍साहवर्धक जयघोष एवं संत-महंतों की वंदनीय उपस्थिति में रामनाथी, फोंडा स्थित श्री रामनाथ देवस्‍थान में हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से आयोजित वैश्विक हिन्दू राष्‍ट्र महोत्‍सव का अर्थात ‘अखिल भारतीय हिन्दू राष्‍ट्र अधिवेशन’ का प्रारंभ हुआ ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार

‘हिन्दू शब्द की व्याख्या है ‘हीनान् गुणान् दूषयति इति हिंदुः ।’, ‘हीनान् गुणान् अर्थात हीन, कनिष्ठ रज और तम गुणों का ‘दूषयति’ अर्थात नाश करनेवाला ! इस व्याख्या के अनुसार देखें तो हिन्दुओं में केवल १० प्रतिशत हिन्दू ‘खरे हिन्दू’ हैं ।
शेष ९० प्रतिशत केवल जन्महिन्दू हैं ।

सतर्कता, आक्रामकता और विस्तारवादी नीति से ही हिन्दू धर्म की सुरक्षा संभव ! – महामंडलेश्वर आचार्य स्वामी प्रणवानंद सरस्वतीजी, संस्थापक, श्री स्वामी अखंडानंद, गुरुकुल आश्रम, इंदौर, मध्य प्रदेश

‘‘हिन्दू एकता के बिना हिन्दू राष्ट्र का सपना हम साकार नहीं कर सकते । हिन्दुओं का एक होना ही सबसे महत्त्वपूर्ण बात है । सभी हिन्दुओं में एकता की भावना होनी चाहिए । हम भले ही विविध जाति अथवा संप्रदाय के हों, तब भी हममें एकता की भावना होनी चाहिए ।

धर्मकार्य में योगदान से ही हमारा जीवान सार्थक होगा ! – महामंडलेश्वर नर्मदा शंकरपुरी महाराज, निरंजनी आखाडा, जयपुर, राजस्थान

धर्मकार्य में हमारा योगदान कितना है, यह  चिंतन का विषय है । विश्व की उपेक्षा कर आगे जाना है अथवा फूल की भांति सबको सुगंध देते हुए आगे जाना है, यह हमें निश्चित करना चाहिए ।

संपादकीय : बढती हुई रेल दुर्घटनाएं चिंताजनक !

रेल विभाग पुरानी तथा कालबाह्य व्यवस्था हटाकर नई आधुनिक व्यवस्था का उपयोग कर दुर्घटर्नाओं को टाले !

विदेशों में हिन्दुओं की दयनीय स्थिति तथा बढता धर्मांतरण !

मानवाधिकार संगठन हम जैसे सीधे-साधे हिन्दू संगठनों को आंख दिखाता है; परंतु उनमें से किसी में भी मुसलमानों को आंख दिखाने का साहस नहीं है । जो अन्याय सहन करते आया है, वह हिन्दू है ! उनकी रक्षा करनेवाला कोई रक्षक नहीं है ।

कर्नाटक में हलाल विरोधी आंदोलन को मिली सफलता !

हमें भारतमाता के प्रत्येक राज्य में ‘हलाल अर्थव्यवस्था’ के विरोध में आंदोलन सफल बनाना है । यह अर्थव्यवस्था भारत के लिए अत्यंत संकटकारी सिद्ध हो रही है । उसके कारण हमारा राष्ट्र आर्थिक दृष्टि से दुर्बल हो रहा है, साथ ही हलाल अर्थव्यवस्था अर्थात हिन्दू धर्म एवं संस्कृति के विरुद्ध षड्यंत्र है ।

‘भूमि जिहाद’ के विरुद्ध लडने की आवश्यकता !

हिन्दू, ईसाई, बौद्ध अथवा जैनों के धार्मिक ग्रंथों में ‘जिहाद’ शब्द का संदर्भ नहीं है । उसका संदर्भ मुसलमानों के कुरान, सुरा, हदीस, फतवा, साथ ही औरंगजेब द्वारा लिखे गए ग्रंथ आलमगिरी में मिलता है ।

साम्यवादियों का समकालीन हिन्दूविरोधी प्रचार !

‘हिन्दू एवं मुसलमानों का सहअस्तित्व देश के लिए विनाशकारी सिद्ध होगा’, ऐसा दूरदृष्टि से बोलनेवाले डॉ. आंबेडकर एकमात्र थे । वे कांग्रेस के नेताओं के कडे आलोचक थे ।