(टिप्पणी : हलाल का अर्थ है इस्लाम के अनुसार जो वैध होता है, वह !)
१. हिन्दू जनजागृति समिति के कारण ‘हलाल प्रमाणपत्र’ का परिचय
‘हमें भारतमाता के प्रत्येक राज्य में ‘हलाल अर्थव्यवस्था’ के विरोध में आंदोलन सफल बनाना है । हमने कर्नाटक में जो किया, उसे प्रत्येक हिन्दू को करना चाहिए । उसके लिए मैं केवल ३ प्रमुख सूत्र रखनेवाला हूं, जिसकी सहायता से आप अपना प्रभाग, गांव तथा शहर में यह आंदोलन चला सकते हैं । वर्ष २०१७ में मुझे ‘हलाल अर्थव्यवस्था’ की जानकारी मिली । यह अर्थव्यवस्था भारत के लिए अत्यंत संकटकारी सिद्ध हो रही है । उसके कारण हमारा राष्ट्र आर्थिक दृष्टि से दुर्बल हो रहा है, साथ ही हलाल अर्थव्यवस्था अर्थात हिन्दू धर्म एवं संस्कृति के विरुद्ध षड्यंत्र है । हिन्दू जनजागृति समिति तथा समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे के कारण मैं इस विषय से परिचित हुआ ।

२. हलाल प्रमाणपत्र के विषय में लोगों में जागृति लाने का निश्चय !
उसके उपरांत मैंने ‘हलाल अर्थव्यवस्था’ के विषय में बहुत जानकारी प्राप्त की । इस जानकारी के आधार पर अनेक वीडियो बनाकर उन्हें सामाजिक माध्यमों पर (सोशल मीडिया पर) प्रसारित किया । हमारा प्रचार सामाजिक माध्यम, वॉट्सएप, पीडीएफ धारिकाओं तक ही सीमित था । हमारे हिन्दू भाई-बहन यह सब पढकर उसे एक ओर रख रहे थे । ‘हलाल के विषय में कुछ तो बता रहे हैं’, केवल इतना ही वे विचार कर रहे थे । ९० प्रतिशत हिन्दुओं को इसके प्रति किसी प्रकार की चिंता नहीं थी; परंतु हमें लोगों को जागरूक करना था । हमें प्रत्येक हिन्दू तथा भारतीयों के मन में ‘हलाल अर्थव्यवस्था देश के लिए संकटकारी सिद्ध हो रही है तथा वह भारत को दुर्बल बना रही है’, यह अंकित करना था । बेंगळूरु में स्थित हमारे २० लोगों के समूह ने इस आंदोलन को केवल ‘यू ट्यूब’, ‘फेसबुक’ आदि तक ही सीमित न रखकर सडक पर उतरकर जागृति करना सुनिश्चित किया ।
३. हलालविरोधी जागृति का कांग्रेस के नेताओं द्वारा विरोध
हमने इस विषय पर आधारित १ सहस्र पत्रक छापकर प्रतिदिन उनका वितरण करना सुनिश्चित किया । उसके अनुसार हमने १५ दिन तक पत्रकों का वितरण किया । हमने श्री. रमेश शिंदे के मार्गदर्शन के सूत्रोंवाले १ लाख पत्रक छाप लिए । हम इन पत्रकों को लेकर १५ दिन बेंगळूरु के प्रत्येक घर तक पहुंचे । हमने लोगों को उनके नित्य उपयोगवाले उत्पादों के आवरण पर अंकित ‘हलाल’ का चिन्ह दिखाया, साथ ही मांस की खरीद के विषय में जागृति की । चुनाव के समय किए जानेवाले प्रचार की भांति हम सवेरे ९ से सायंकाल ५ बजे तक इस विषय में जनजागरण कर रहे थे । उसके कारण राष्ट्रविरोधी कांग्रेस के एक स्थानीय नेता ने धमकी दी कि ‘आप लोग घर-घर में इतने पत्रक बांट रहे हैं, उसके कारण सांप्रदायिक तनाव बढकर सामाजिक सौहार्द बिगड रहा है । आप हिन्दुओं को बांट रहे हैं । आपके इस पत्रक वितरण से दंगे हो सकते हैं; इसलिए हम पुलिस में शिकायत करेंगे ।’ हमें लगा कि ‘ये तो स्थानीय नेता है, ये कुछ नहीं करेंगे’; परंतु उनकी संख्या बढती गई । उनकी भांति हमारे भी कार्यकर्ता दोगुनी संख्या में बढे । उस समय देश के, साथ ही राज्य के प्रमुख प्रसारमाध्यमों में, कन्नड चैनलों तथा समाचारपत्रों में इसके संदर्भ में समाचार आने लगे थे । इस आंदोलन का इतना प्रचार हुआ कि आरंभ में हमारे पास २० कार्यकर्ता थे, जो ३ दिन में ही १५० तक बढे तथा ये सभी प्रत्यक्ष आंदोलन में सम्मिलित हुए ।
४. कर्नाटक के अन्नपदार्थ मंत्री के द्वारा हलाल विरोधी जागृति का लिया गया संज्ञान
हमारे ये १५० कार्यकर्ता पत्रक बांटने हेतु बेंगळूरु के घर-घर गए तथा उन्होंने लोगों से हाथ जोडकर बताया कि ‘हलाल’ प्रमाणित उत्पाद खरीदना भारत के हित में नहीं है । हमने प्रत्येक गली तथा प्रत्येक सडक पर जाकर यह विषय रखा, साथ ही पत्रकार सम्मेलन कर तथा दूरदर्शन पर भी यह विषय बताया । उसके कारण १५ दिन में यह विषय राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय विषय बन गया । कर्नाटक राज्य के अन्नपदार्थ निदेशक को एक परिपत्रक भेजकर हमने ‘हलाल’ प्रमाणित उत्पादों की सूची मांगी । यह है हिन्दुओं की शक्ति ! इस प्रकार से हिन्दुओं के परिश्रम को सफलता मिली ।
कर्नाटक सरकार ने अन्नपदार्थ निदेशक को भेजे पत्रक में सभी सरकारमान्य प्रमाणित उत्पादों तथा मांस के विक्रेताओं से पूछा कि ‘कौनसे उत्पाद’ ‘हलाल’ प्रमाणित हैं, क्या यह ग्राहकों को बताया जाता है ?’ ‘ग्राहक बाजार का राजा है’, ऐसा बताकर ‘मुसलमानों को ‘हलाल प्रमाणित उत्पाद चाहिए; इसलिए उन्हें हिन्दुओं पर थोपा नहीं जा सकता’, ऐसा बताया । उसपर बेंगळूरु में ‘ऑनलाइन’ मांसबिक्री करनेवाले उत्पादकों ने स्वीकार किया कि उनके द्वारा हलाल प्रमाणित मांस की बिक्री की जा रही है । उस पत्र को लेकर हम बेंगळूरु उच्च न्यायालय में याचिका प्रविष्ट की । ‘भारतमाता के आशीर्वाद से तथा सभी की प्रार्थनाएं फलीभूत होकर न्यायालय ‘हलाल उत्पाद अवैध हैं’, ऐसा घोषित करेगा’, इसके प्रति मैं आश्वस्त हूं ।
५. समस्त हिन्दुत्वनिष्ठों को कर्नाटक का आदर्श सामने रखना आवश्यक !
इस विषय में हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. रमेश शिंदे ने बहुत शोधकार्य किया है । इसलिए इस विषय पर केवल भाषण देकर नहीं चलेगा; अपितु घर-घर में तथा अपने पडोस में भी इस विषय पर चर्चा होनी चाहिए । दुकान में जाने पर हमें बताना पडेगा कि ‘हलाल प्रमाणित’ है; इसलिए ‘आशीर्वाद’ प्रतिष्ठान का आटा तथा ‘डाबर’ का शहद मुझे नहीं चाहिए ।’ दुकानदार इस विषय में मध्यस्थ है । यह मध्यस्थ उत्पादक को यह बात बताएगा । यह एक शृंखलाबद्ध प्रक्रिया है, जिसका हमें आरंभ करना है । यह अत्यंत महत्त्वपूर्ण है; क्योंकि उत्पादकों की दृष्टि से ग्राहक अत्यंत महत्त्वपूर्ण है । ग्राहक को जो चाहिए, उसे उत्पादकों को देना ही पडता है । इसके लिए हमें जनजागरण करना होगा । मुझे लगता है कि ‘कर्नाटक में जो कुछ भी हुआ, उसे प्रत्येक हिन्दू को अपने गांव में करना चाहिए ।’
– श्री. प्रशांत संबरगी, फिल्म वितरक तथा उद्योगपति, बेंगळूरु, कर्नाटक

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