कलुषित ‘विजन’ !

     शासन लोकतंत्र व्यवस्था का आधारस्तंभ है । हमारे देश में प्रत्येक ५ वर्ष में चुनाव होते हैं और शासनकर्ता बदल जाते हैं, तब भी प्रशासकीय कर्मचारी एवं अधिकारी वही होते हैं । शासनकर्ताओं द्वारा लागू की गई योजनाओं को कार्यान्वित करनेवाला प्रशासन ही होता है । अत: ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि … Read more

पाश्चात्य संगीत : प्राणों से खिलवाड !

नांदेड के मुदखेड तालुका का एक युवक व्यसनाधीन था । इससे उसकी पढाई छूट गर्स और वह निराशाग्रस्त हो गया । ऐसी निराशाग्रस्त अवस्था में उसने मूल हंगेरियन भाषा का गाना ‘ग्लूमी संडे’ (खिन्न रविवार) का हिन्दी रूपांतर सुना । यह गाना सुनने के पश्चात उसका बचा-खुचा मानसिक संतुलन भी धराशायी हो गया ।

गोल्डबर्ग का अपराध !

अमेरिकी समाज पर अभिव्यक्ति स्वतंत्रता एवं व्यक्ति स्वतंत्रता की बहुत दृढ पकड होते हुए भी गोल्डबर्ग के प्रसंग में कोई भी उनका पक्ष लेने नहीं आया । ऐसा क्यों हुआ ? ‘ज्यू का वंशविच्छेद, धार्मिक नहीं था, अपितु वांशिक था । इतना भी गोल्डबर्ग को कैसे पता नहीं ?’, ऐसा ही सुर अमेरिकी समाज के अनेक लोगों ने आलापा ।

हिमंत बिस्व सरमा की हिम्मत !

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के अनुसार पुलिस को अधिकार मिले हैं कि वे संदिग्ध गोतस्करों में घर में प्रवेश कर खोज करने और गोतस्कर द्वारा पिछले ६ वर्षाें में अवैध पशु व्यापार से प्राप्त संपत्ति जप्त कर सकते हैं ।

आतंकवादी ‘जमात’ !

विशेषज्ञों का मानना है कि आनेवाले समय में खाडी देशों के भूगर्भ में स्थित पेट्रोल और डीजल का भंडार खाली हो जाने की संभावना है । इसलिए संपूर्ण विश्व के देश इन ईंधनों के विकल्प के रूप में अन्य स्रोतों की खोज कर रहे हैं । उसमें बिजली, हाइड्रोजन आदि विविध विकल्प सामने आ रहे हैं ।

मंदिरों पर लगाया गया ‘जजिया कर’ !

मंदिरों से बिहार सरकार अब ४ प्रतिशत ‘कर’ वसूल करनेवाली है, यह संपूर्ण देश के हिन्दुओं के लिए लज्जाजनक है । हिन्दुओं के इतिहास में अभी तक ऐसा कभी नहीं हुआ था ।

प्रदूषण पर उपाय !

प्रदूषण पर पूरी मात करने के लिए डेढ-दो शतक पहले जैसी स्थिति थी, कम से कम वैसी स्थिति अब निर्माण करनी चाहिए । वह अब संभव नहीं; परंतु उस दिशा में प्रयास करना चाहिए ।

‘स्टैलिन’ सरकार की थोथी बातें एवं हिन्दुओं के कर्तव्य !

मद्रास उच्च न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि ‘मंदिर का स्वर्ण पिघलाने संबंधी निर्णय लेने का अधिकार केवल विश्वस्तों को है ।’ इस पर राज्य सरकार ने न्यायालय को लिखित आश्वासन दिया है कि ‘विश्वस्त की नियुक्ति की जाएगी ।’

हिन्दूद्वेषियों का वैचारिक उच्चाटन !

हिन्दूद्वेषियों द्वारा हिन्दुओं के विरोध में विषवमन करने के उपरांत हिन्दू-संगठन अधिक बलवान होने के लिए अब हिन्दुओं को अपना पद, पक्ष, संप्रदाय, संगठन आदि को एक ओर रखते हैं और हिन्दू-संगठन की व्याप्ति वृद्धिंगत करते हुए हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए कटिबद्ध होते हैं !

‘गजवा-ए-हिन्द’ की दिशा में मार्गक्रमण?

अफगानिस्तान में हो रही गतिविधियां ‘गजवा-ए-हिन्द’ की संभावना की ओर संकेत कर रही हैं । यदि ऐसा नहीं होने देना है, तो भारत के हिन्दुओं को संगठित होकर हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करना अपरिहार्य है, यह ध्यान में रखें !