संपादकीय : ‘वन्दे मातरम्’
‘वन्दे मातरम्’ के अनिवार्य होने का हर्ष मनाते हुए, हमें भविष्य में इसे राष्ट्रगान बनाने हेतु सार्थक प्रयास करने चाहिए !
‘वन्दे मातरम्’ के अनिवार्य होने का हर्ष मनाते हुए, हमें भविष्य में इसे राष्ट्रगान बनाने हेतु सार्थक प्रयास करने चाहिए !
रक्षा एवं आर्थिक क्षेत्र में शक्तिशाली होने पर भारत महासत्ता बन सकता है, यह ध्यान में रखते हुए प्रयास करना आवश्यक !
सनातन धर्म, धर्मग्रंथ, देवता, संत, राष्ट्रपुरुष आदि की ओर वक्रदृष्टि से देखने का किसी का साहस नहीं होगा, ऐसा भय हिन्दुओं द्वारा निर्माण करना आवश्यक !
अपनी समस्याएं निपटाने के लिए भारत को अपनी सौम्य भूमिका छोडकर आक्रामक नीति अपनाना आवश्यक !
‘लोकतंत्र और संविधान के माध्यम से ‘हिन्दू राष्ट्र’ आ सकता है’, यह प्रतिबिंबित करने के लिए ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ का आयोजन !
सम्मानपूर्वक फहरानेवाला यह धर्मध्वज बता रहा है कि ‘आनेवाले कुछ वर्षाें में ‘आर्थिक महासत्ता’ बननेवाला भारत ‘आध्यात्मिक महासत्ता’ कहलाएगा । उसकी पुकार सुनकर उसका यथोचित सम्मान रखने के लिए अब शासन के साथ प्रत्येक देशभक्त और देवभक्त को संगठित रूप से रामनाम का जयघोष अपने अंतरंग में बसाना चाहिए !
केंद्र सरकार को इस अवसर का लाभ उठाकर पाकिस्तान की कमर पूरी तरह से तोड देनी चाहिए । भारत के सिर पर बैठा यह पाप नष्ट हुए बिना भारत को शांति नहीं मिलेगी । ‘हिन्दू राष्ट्र’ इस एक नाम में इस पापस्थान को नष्ट करने की सूक्ष्म क्षमता है, यह सदैव निश्चित है !
भारत के राष्ट्रप्रमुख की हत्या का षड्यंत्र रचनेवाला अमेरिका क्या कभी भारत का मित्र हो सकता है ?
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने यदि रा.स्व. संघ की शाखाओं पर प्रतिबंध लगाया, तो उसका यह निर्णय कांग्रेस के राजनीतिक विनाश का कारण बनेगा !
विश्व के मानचित्र से पाकिस्तान का अस्तित्व नष्ट करना ही भारत की खरी एवं अंतिम विजय होगी, यह भारतियों को नित्य ध्यान में रखना चाहिए !