आश्रम के साधकों को अन्य साधकों से निकटता बनाने के लिए ‘गुरुदेवजी का आश्रम ही मेरा घर है’, यह भाव रखने का महत्त्व !
आश्रम के साधकों से वास्तव में ‘कुटुंब भावना’ रखकर उनके साथ निकटता बनाकर हमने व्यवहार किया, तो परिजनों की भांति साधक भी हमें हमारे अपने लगेंगे !