पू. भगवंत कुमार मेनरायजी के पार्थिव शरीर से प्रचुर मात्रा में चैतन्य प्रक्षेपित होना तथा उनके अंतिम दर्शन करनेवाले साधकों को आध्यात्मिक लाभ होना

‘संतों के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक दृष्टि से क्या लाभ होता है ?’, इसके संदर्भ में महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय की ओर से ‘यू.ए.एस. (यूनिवर्सल ऑरा स्कैनर)’ उपकरण तथा लोलक के द्वारा शोध किया गया ।

धर्मप्रसार हेतु अधिकाधिक संत बनने आवश्यक ! – बाल सुब्रह्मण्यम्, निदेशक, मंगलतीर्थ इस्टेट एवं ब्रुकफील्ड इस्टेट, चेन्नई, तमिलनाडू

वेद, पुराणों, उपनिषदों, गीता, रामायण, महाभारत आदि धर्मग्रंथों में एक शब्द का भी परिवर्तन हुए बिना वे हम तक पहुंचे हैं । यह केवल गुरु-शिष्य परंपरा के कारण संभव हुआ है; इसलिए हमें गुरु-शिष्य परंपरा का सम्मान करना चाहिए ।

साधकों को संतों के सत्संग में कुछ न बोलना हो, तब भी सत्संग से होनेवाले लाभ प्राप्त करने के लिए उन्हें सत्संग में बैठना चाहिए !

‘संत अर्थात ईश्वर का सगुण रूप ! ‘उनका सत्संग मिलना’ साधकों का अहोभाग्य ही है । संतों के सत्संग में रहने पर उनमें विद्यमान ईश्वरीय चैतन्य का साधकों को लाभ मिलता रहता है ।

देहू (पुणे) में लाखों भक्तों की उपस्थिति में तुकाराम बीज समारोह संपन्न !

देहुनगरी में वारकरी  संप्रदाय द्वारा भावपूर्ण अभंग का गायन एवं ज्ञानोबा माउली-तुकाराम के जय घोषों से गूंज उठी नगरी ।

आज तक आपातकाल को आगे ले जाने का मुख्य कारण है महान संतों-महात्माओं की कृपा !

सामान्य व्यक्तियों के लिए इस भीषण आपातकाल का सामना करना असंभव होगा । उसके कारण ही अभी तक अनेक बार संतों-महात्माओं ने सामान्य जीवों का विचार कर अपनी साधना खर्च कर इस आपातकाल को आगे बढा दिया है । सामान्य लोग जब अपनी साधना बढाएंगे, तभी जाकर यह आपातकाल उनके लिए सहनीय हो पाएगा !

आपातकाल संबंधी संतों द्वारा किया भाष्य !

इस विश्वयुद्ध में देश की इतनी हानि होगी कि उसके उपरांत ‘राष्ट्र के पुनर्निर्माण हेतु पूरी एक पीढी को अपना जीवन देना पडेगा ।

Swami Jitendranand Saraswati : जब तक हिन्दुओं को ज्ञानवापी नहीं मिलती, तबतक अन्न ग्रहण नहीं करूंगा ! – स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती

आज से वे दिन में केवल सवा लीटर दूध का सेवन करेंगे ।

Swami Rambhadracharya Maharaj : पाक अधिकृत कश्मीर प्राप्त करने हेतु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज कर रहे हैं यज्ञ !

स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने आगे कहा कि रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा शास्त्रानुसार ही हो रही है । श्रीराम मंदिर का गर्भगृह बन गया है, वह अधूरा नहीं है ।

Brutal Murder Hindu Saint : स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या की जांच सीबीआई को क्यों न दें ? 

ओडीसा उच्च न्यायालय ने ओडीसा सरकार को नोटिस भेजकर पूछा प्रश्न !

यदि साहस है, तो श्रीरामचरितमानस पर चर्चा करें ! – श्री रामभद्राचार्य

श्री रामभद्राचार्य की बिहार के शिक्षामंत्री प्रा. चंद्रशेखर को चुनौती !