‘सांस्कृतिक आतंकवाद’ (‘कल्चरल टेररिजम’) का सामना करने के लिए केवल चर्चा नहीं, अपितु ठोस कार्य योजना आवश्यक !
भारतीय संस्कृति को नष्ट करने हेतु विगत अनेक वर्षाें से षड्यंत्र रचकर प्रयास किए जा रहे हैं । इस विचार गोष्ठी में ‘सनातन संस्कृति की रक्षा’ जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर विचार मंथन हुआ । सभी को इस कार्यक्रम में सहभागी होने का आवाहन किया गया । संकलनकर्ता – श्री. प्रशांत जुवेकर, जळगांव