सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव हेतु सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी का मार्गदर्शक संदेश

हिन्दू धर्मबंधुओ और भगिनियो,
आज हम सब यहां एक ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए एकत्र हुए हैं । यह केवल एक उत्सव नहीं, अपितु सनातन राष्ट्र का ‘शंखनाद’ है । शंखनाद या तो युद्ध से पूर्व किया जाता है या फिर किसी शुभ कार्य के आरंभ में । आज का यह शंखनाद एक महान परिवर्तन का प्रतीक है ।
१. हिन्दुओं की लज्जाजनक वर्तमान स्थिति में परिवर्तन लाना है !
आज देश में हिन्दू बहुसंख्यक हैं, फिर भी अपने ही देश में, अपने ही धर्म का पालन करते समय हमें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड रहा है । जिस भूमि पर प्रभु श्रीराम ने आदर्श राज्य स्थापित किया, वहां आज ‘रामराज्य’ तो दूर, भारत के कश्मीर, केरल, बंगाल आदि अनेक प्रदेशों में हिन्दुओं के लिए सरल, सुरक्षित और सम्मानपूर्ण जीवन जीना भी कठिन होता जा रहा है । यह हम सभी के लिए लज्जाजनक है । इस स्थिति में अब परिवर्तन लाना ही होगा ।
२. रामराज्य ही हमारा लक्ष्य है
हमारा लक्ष्य क्या है ? केवल ‘हिन्दू राष्ट्र’ की घोषणा करना हमारा अंतिम ध्येय नहीं है । यदि ‘हिन्दू राष्ट्र’ एक शरीर है, तो ‘रामराज्य’ उसकी आत्मा है । हमें भारत में पुनः एक बार रामराज्य स्थापित करना है ।
३. छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे आदर्श हैं !
हमारे समक्ष छत्रपति शिवाजी महाराजजी का आदर्श है । प्रतिकूल परिस्थितियों और मुगल साम्राज्य की प्रबलता के बीच भी महाराज ने मुट्ठीभर मावळों (सैनिकों) को साथ लेकर ‘हिन्दवी स्वराज्य’ की स्थापना की । यह केवल एक राज्य नहीं था, अपितु प्रजा-कल्याण के लिए स्थापित ‘रामराज्य’ था । यदि महाराज उस काल में यह कर सके, तो आज हम इतनी विशाल संख्या में होकर ऐसा क्यों नहीं कर सकते? निश्चित ही कर सकते हैं ! श्रीराम और संतों की कृपा से हम उस दिशा में आगे बढ सकते हैं ।
४. कार्य की दिशा
रामराज्य की स्थापना केवल भाषणों से नहीं होगी । इसके लिए शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक, इन तीनों स्तरों पर कार्य करना होगा ।
४ अ. शारीरिक स्तर : जहां भी धर्म पर आघात हो, वहां कानूनी मार्ग से और संगठित होकर विरोध करना
४ आ. मानसिक–वैचारिक स्तर : सनातन धर्म और राष्ट्र पर आए संकटों के विषय में निरंतर जागृति करना
४ इ. आध्यात्मिक स्तर : यह सबसे महत्त्वपूर्ण है । किसी भी संघर्ष में विजय के लिए ईश्वरीय अधिष्ठान आवश्यक होता है ।
५. रामराज्य की संकल्पना और प्रशासनिक सुधार
रामराज्य के लिए आदर्श शासन (Good Governance) की आवश्यकता होगी । इसके लिए वर्तमान व्यवस्था में सुधार करना अनिवार्य है । आज हम देखते हैं कि सरकारी कार्यालयों में सामान्य व्यक्ति को अनेक बार खराब व्यवहार सहना पडता है, कार्य समय पर नहीं होते । यह भ्रष्टाचार और अव्यवस्था रामराज्य में स्वीकार्य नहीं ।
इसलिए यहां उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति से मेरा आवाहन है – कानून की मर्यादा में रहते हुए इस भ्रष्टाचार का सामना करें । यदि किसी भी सरकारी कार्यालय में आपके साथ अनुचित व्यवहार हो, रिश्वत मांगी जाए या काम रोका जाए, तो भयभीत न हों । इस अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाएं । अपने अनुभव हमें लिखकर भेजें । हम उन्हें ‘सनातन प्रभात’ पत्रिका में प्रकाशित करेंगे । प्रशासन की त्रुटियों के विषय में हम भाषणों और माध्यमों से जनजागृति करेंगे । ऐसी जागृति करना एक संवैधानिक कर्तव्य भी है और रामराज्य की स्थापना की दिशा में यह एक महत्त्वपूर्ण कदम होगा ।
६. रामराज्य लाने के लिए साधना करें !
केवल प्रशासन के सुधार से कार्य पूरा नहीं होगा । कहा जाता है – ‘जैसा राजा, वैसी प्रजा’; परंतु लोकतंत्र में ‘जैसी प्रजा, वैसा राजा’ होता है । रामराज्य में प्रत्येक नागरिक सात्त्विक था, धर्माचरण करता था; इसलिए वह रामराज्य था ।
अब तक अनेक राजसत्ताएं आईं, किंतु कोई भी हमें रामराज्य नहीं दे सकी; क्योंकि समाज और राज्यकर्ता साधना-रहित थे । यदि रामराज्य चाहिए, तो पहले हमें ‘रामभक्त’ बनना होगा । वर्तमान समय में रामराज्य के कार्य में ईश्वरीय बल प्राप्त करने हेतु प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन कम-से-कम आधा घंटा ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ जप करे । इससे हम अपना आध्यात्मिक बल बढा सकते हैं । जितनी हमारी साधना बढेगी, उतनी सात्त्विकता भी बढेगी । रामराज्य सात्त्विक लोगों का राष्ट्र होता है; इसलिए प्रत्येक व्यक्ति सात्त्विक बनने का प्रयास करे ।
७. रामराज्य के लिए योगदान दें !
‘सनातन राष्ट्र’ अर्थात रामराज्य का यह कार्य ईश्वरीय कार्य है और यह होकर रहेगा । प्रश्न केवल इतना है कि इसमें हमारा योगदान क्या है ? जिसके लिए जैसे संभव है, वैसे वह इस कार्य में सहभाग ले – कोई लेखन के माध्यम से सहभाग लेगा, तो कोई कानूनी संघर्ष, कोई अर्पण देकर और कोई प्रत्यक्ष कार्य से सहभाग लेगा । अपने सामर्थ्य के अनुसार रामराज्य हेतु अधिकाधिक योगदान दें !
आज से ही स्वयं में और समाज में परिवर्तन लाने का संकल्प करें । प्रभु श्रीराम के चरणों में प्रार्थना करें – ‘हमें इस रामराज्य-स्थापना के शिवधनुष को धारण करने की शक्ति प्रदान करें !’
जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम् ! जय श्रीराम !
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
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