सात्त्विकता एवं संगठन ही राष्ट्र के उत्कर्ष की चाबी – जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी
हिन्दू धर्मियों को सभी भेद भूलकर एकत्रित होना आवश्यक है । हमारा तथा प.पू. डॉ. आठवलेजी का (सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी) का लक्ष्य (कार्य) एक ही है तथा वह है हिन्दू धर्म की रक्षा एवं उत्थान । – जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी