Shankhnad Mahotsav Delhi : ‘दिल्ली सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ विशेषांक

पांडवों का इंद्रप्रस्थ अर्थात वर्तमान दिल्ली ! यहां संपन्न हुए धर्मतेज एवं क्षात्रतेज से युक्त ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ ने पूरे भारत में हिन्दू राष्ट्र स्थापित करने का संदेश दिया । राष्ट्र हेतु आवश्यक ३ महत्त्वपूर्ण सूत्र – संस्कृति, शौर्य एवं सुरक्षा पर इस महोत्सव में हुए विचार-मंथन ने हिन्दुओं को सक्रिय बनने की प्रेरणा दी । महोत्सव के कुछ विशेष सूत्र इस विशेषांक में प्रस्तुत हैं ।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्यांश के साथ (बाएं से) श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी, श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी एवं वेदप्रचाररत्न वेदकुलपति श्री. जी.के. सीतारामन्जी

आतंकवाद को ऐसे ही समाप्त करना पडता है !

छत्रपति शिवाजी महाराज ५ मुगल साम्राज्यों को झुकाने में सफल रहे; क्योंकि वे जानते थे कि जिहादी आतंकवाद को कैसे समाप्त किया जाए और उनमें उसे नष्ट करने का शौर्य भी था ।

हिन्दू जनजागृति समिति के स्वरक्षा प्रशिक्षणवर्ग के साधकों ने अफजल खान वध का प्रसंग प्रस्तुत कर सभी में शौर्य जागृत किया !
दिल्ली मराठी प्रतिष्ठान के संस्थापक श्री. वैभव डांगेजी (बाएं से) का स्वागत करते सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी
दूरदर्शन के संपादक श्री. अशोक श्रीवास्तव (बाईं ओर) व सनातन के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. अभय वर्तक की स्नेहपूर्ण भेंट
♦ जन-जन की इस सहभागिता ने महोत्सव को ऐतिहासिक एवं देशव्यापी सफल बनाया ।

♦ ‘महोत्सव’ सोशल मीडिया के माध्यम से २३.५ करोड से अधिक लोगों तक पहुंचा ।