‘सेव कल्चर सेव भारत फाऊंडेशन’ के संस्थापक अध्यक्ष तथा ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ के सह-आयोजक श्री. उदय माहुरकरजी द्वारा ‘सनातन प्रभात’ के प्रतिनिधि से व्यक्त किया गया मनोगत !
‘सनातन राष्ट्र शंखनाद’ अर्थात भारतविरोधी शक्तियों के विरुद्ध युद्ध का उद्घोष !

इस महोत्सव से सकारात्मक ऊर्जा का एक ऐसा प्रवाह निर्मित हुआ है, जो निरंतर बढता ही जाएगा । इसे रोकना असंभव है । जो समूह भारत को विभाजित रखना चाहता है, ऐसी भारतविरोधी शक्तियों के विरुद्ध यह दो दिवसीय आयोजन युद्ध के एक उद्घोष के समान ही था । भारत की सुरक्षा एवं संस्कृति के लिए यह कार्यक्रम अत्यंत महत्त्वपूर्ण है ।
१. हिन्दुत्व का सच्चास्वरूप प्रस्थापित करनेवाली ‘सनातन संस्था’ !
‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ ने संपूर्ण उत्तर भारत में हिन्दुत्व की ऊर्जा का संचार किया है । छत्रपति शिवाजी महाराजजी के विचारों का आगे ले जाते हुए सनातन संस्था द्वारा आयोजित यह महोत्सव एक प्रकार से भारतविरोधी अथवा हिन्दूविरोधी शक्तियों के लिए चुनौती सिद्ध हुआ है ।

२. हिन्दी फिल्म जगत के प्रभाव से दूरसात्त्विक संस्था है – ‘सनातन संस्था’ !
यह महोत्सव एक अभूतपूर्व घटना है । सनातन संस्था भारत की सबसे सात्त्विक संस्था है । जिस हिन्दुत्वनिष्ठ संस्था पर
हिन्दी फिल्म जगत का (बॉलीवुड का) प्रभाव नहीं है, वही सात्त्विक संस्था है ! सनातन संस्था छत्रपति शिवाजी महाराजजी के कार्य एवं उनकी दूरदृष्टि को आगे ले जाने का महान कार्य कर रही है ।
३. छत्रपति शिवाजी महाराजजी के कार्य के विषय को देश के सामने रखनेवाले कार्यक्रम का ७८ वर्ष के उपरांत भव्य आयोजन !
सनातन संस्था के कुछ शत्रु भी हैं । इन शत्रुओं को ऐसा लगता है कि ‘अखंड भारत’ का सपना साकार करने के कार्य में सनातन संस्था बाधा बन रही है । ऐसी स्थिति में भारत मंडपम् में इतने बडे स्तर पर इस महोत्सव का आयोजन करना बडी घटना है । विगत ७८ वर्षाें में महाराष्ट्र के बाहर छत्रपति शिवाजी महाराजजी के विचार एवं उनके योगदान पर आधारित इस प्रकार का भव्य आयोजन पहली बार हो रहा है, उसके कारण इसका विशेष महत्त्व है । इस महोत्सव से जो ऊर्जा उत्पन्न होगी, वह निश्चित ही उत्तर भारत में सर्वदूर फैलेगी ।
– श्री. उदय माहुरकरजी, ‘सेव कल्चर सेव भारत फाउंडेशन’
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संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
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