१३ से १५ दिसंबर की अवधि में दिल्ली के भारत मंडपम् में सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव एवं राष्ट्र-धर्म जागृति से संबंधित प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था । इस महोत्सव के विषय में हिन्दू जनजागृति समिति के धर्मप्रचारक सद्गुरु नीलेश सिंगबाळजी को प्रतीत हुए सूत्र यहां दिए हैं ।

१. महोत्सव में हिन्दुत्वनिष्ठों का सहभाग दैवीय नियोजन ही था !
‘देश की राजधानी में भव्य स्वरूप में यह आयोजन होना, साथ ही १३ एवं १४ दिसंबर, इन दोनों दिन सभागार में बडी संख्या में धर्मनिष्ठ, राजनेता, अधिवक्ता, उद्योगपति आदि का उपस्थित होना तथा महोत्सव में उनका सहभाग होना, एक दैवीय नियोजन था’, ऐसा मुझे लगा ।
२. पूरे विश्व को हमारी संस्कृति एवं शौर्य के हुए दर्शन !
‘महोत्सव में संपन्न उद्बोधन एवं परिचचाओं के विभिन्न सत्र, साथ ही शौर्य एवं संस्कृति की प्रदर्शनी से पूरे विश्व को भारतीय संस्कृति एवं हमारे शौर्यशाली इतिहास के दर्शन हुए’, ऐसा मुझे लगा ।
गुरु का कार्य एवं उनकी कीर्ति दसों दिशाओं में फैल गई !

केंद्रीय मंत्री, राज्य मंत्री, सांसद एवं विधायक जैसे जनप्रतिनिधियों ने व्यासपीठ से मुक्तकंठ से सनातन संस्था का गौरव किया । ‘गुरुदेवजी का कार्य एवं कीर्ति दसों दिशाओं में फैल रही है’, ऐसा लगकर अनेक बार मेरी भावजागृति हुई ।
– सद्गुरु नीलेश सिंगबाळजी
३. धर्मनिष्ठों द्वारा उनके क्षेत्र में महोत्सव के आयोजन की इच्छा प्रकट की जाना
अनेक धर्मनिष्ठों ने इस महोत्सव के आयोजन से उनके मन में राष्ट्र-धर्म के कार्य में सहभाग लेने की ऊर्जा उत्पन्न होने की बात व्यक्त की । कुछ धर्मनिष्ठों ने ‘हमारे क्षेत्र में भी ऐसा आयोजन होना चाहिए’, यह विचार व्यक्त किया ।
४. एक विचार, एक ध्येय एवं संगठित शक्ति का अपूर्व संगम था सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव !
ईश्वर अथवा गुरु का कार्य उनके संकल्प से कैसे संपन्न होता है ?, इसकी प्रत्यक्ष अनुभूति इस महोत्सव से हुई । गुरुसेवा की अपूर्व प्रेरणा एवं सेवारत साधकों ने भावपूर्ण पद्धति से दिन-रात एक कर सेवा की । सेवा करते समय एक विचार, एक लक्ष्य एवं संगठित शक्ति का अपूर्व संगम भी इस सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव में हुआ ।’
– सद्गुरु नीलेश सिंगबाळजी, धर्मप्रचारक, हिन्दू जनजागृति समिति
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संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
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