नई दिल्ली के भारत मंडपम् में ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ के अवसर पर शिवकालीन (छ. शिवाजी महाराजजी के काल के) ऐतिहासिक शस्त्रों की प्रदर्शनी लगाई गई थी । इस शस्त्र प्रदर्शनी में कई विशिष्ट शस्त्रास्त्र थे, जिनमें तलवार, दांडपट्टा, भाले, भोप तलवार, खंजर, बाघ नख, कटार और वे विशिष्ट हसिया, कुल्हाडी एवं गोफन (गुलेल) आदि शस्त्र भी सम्मिलित थे, जिनका उपयोग किसान-वीरों ने कृषि उपकरणों के रूप में युद्ध के लिए किया था । दिल्लीवासियों ने क्रांतिकारी मंगल पांडे (जिनके कारण वर्ष १८५७ में अंग्रेजों के विरुद्ध प्रथम विद्रोह हुआ था) द्वारा उपयोग की गई बंदूक के समान शस्त्र, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अंगरक्षक की तलवार, शिवकालीन तोपें और तोप के गोलों सहित सैकडों शस्त्रों की प्रदर्शनी का लाभ उठाया । इसके अतिरिक्त, शिवाजी महाराजजी के राज्याभिषेक, वीर बाजीप्रभु देशपांडे और वीरों के ‘कट-आउट’ भी लगाए गए थे । डिजिटल फलकों के माध्यम से मराठों के पराक्रम का विवरण दिया गया था, जिससे प्रदर्शनी स्थल पर ऐसा आभास हो रहा था मानो साक्षात शिवशाही ही अवतरित हो गई है ।
सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव के अंतर्गत मणिपुर की ‘थांग-ता’ नामक प्राचीन युद्धकला, हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से युवाशक्ति को जागृत करने के उद्देश्य से स्वरक्षा प्रशिक्षण तथा कोल्हापुर के सव्यसाचि गुरुकुलम् के विद्यार्थियों द्वारा लाठी, भाला व दांडपट्टा चलाने का प्रदर्शन भी किया गया ।


भारतीय शस्त्र परंपरा के विषय में बच्चों सहित परिवार को भी जानकारी होनी चाहिए ! – सुधांशु त्रिवेदीजी, राष्ट्रीय प्रवक्ता, भाजपा
भारतीय ज्ञान परंपरा के अनेक अज्ञात पक्ष हैं । शस्त्रों में क्या विज्ञान है ? युद्धकला में क्या विषय हैं ? इन्हें देखने का एक उत्कृष्ट अवसर इस प्रदर्शनी के माध्यम से मिला । यह जानकारी संभवतः बहुत से लोगों के पास नहीं होगी । इसलिए भारत में जहां भी ऐसी प्रदर्शनी लगे, वहां जाकर उसे देखना चाहिए । इससे हमारे ज्ञान में वृद्धि होगी और गौरव भी बढेगा । इस विषय को बच्चों के पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाना चाहिए । बच्चों के साथ-साथ पूरे परिवार को ही इस विषय में जानकारी होनी चाहिए ।
सच्चे योद्धाओं का परिचय समाज को होना चाहिए ! – सुदर्शन शर्माजी, सेवानिवृत्त शिक्षिका, दिल्ली
सत्य इतिहास ज्ञात होने के उपरांत भी हम बच्चों को वह नहीं बता सके, क्योंकि जो पुस्तकों में लिखा था, हमें वही पढाना पड़ता था । यहां आने पर यह समझ आया कि वास्तविक योद्धाओं ने अपनी संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राण भी अर्पित कर दिए । उनका परिचय समाज को होना चाहिए । ऐसी शौर्य प्रदर्शनी स्थान-स्थान पर आयोजित की जानी चाहिए, जिससे आनेवाली पीढी को शिवाजी महाराज और पराक्रमी योद्धाओं का परिचय हो सके और वे अपने पूर्वजों के शौर्य को समझ सकें ।



सव्यसाचि गुरुकुलम्

१. दांडपट्टा सम शरीर भी लचीला होना चाहिए, यह दर्शानेवाला प्रदर्शन
२. मनोबल के माध्यम से स्त्री कठिन परिस्थिति का सामना कर सकती है, इसका प्रदर्शन
लचीला शरीर और वज्र समान मन शौर्य के लिए आवश्यक !
लाठी का बल, योद्धा का सामर्थ्य एवं इन पर नियंत्रण के साथ प्रहार !
हिन्दू जनजागृति समिति

वर्तमान स्थिति में महिलाओं और हिन्दुओं पर अत्याचार अत्यधिक बढ गए हैं । इन सबका सशक्त समाधान हिन्दुओं में शौर्य को पुनः जागृत करना है ! समाज के अवांछित तत्त्वों से स्वयं की रक्षा के लिए प्रशिक्षण लेना समय की आवश्यकता है !
युवतियो, अत्याचारियों को खदेडकर आत्म-बोध जगाएं और ‘आप रणरागिनी हैं’, यह सिद्ध कर दें !
महिलाओ, स्वरक्षा सीखो ! अत्याचारों का प्रतिकार करो !








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