दिल्ली सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव में ‘सनातन संस्कृति की रक्षा’ संबंधी चर्चा सत्र के माध्यम से सक्रिय होने का आवाहन
कुछ दिन पूर्व ही दिल्ली में संपन्न ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ में विभिन्न महत्त्वपूर्ण विषयों पर विचार गोष्ठी हुईं । उनमें विभिन्न क्षेत्रों में जुझारू वृत्ति से कार्य करनेवाले मान्यवरों ने उनके द्वारा किए जा रहे कार्य, उन्हें मिल रहे प्रत्युत्तर तथा सनातनी हिन्दुओं को किस प्रकार उनके कार्य में सहभागी होना चाहिए ?, इस विषय पर अपने-अपने मनोगत व्यक्त किए ।

भारतीय संस्कृति को नष्ट करने हेतु विगत अनेक वर्षाें से षड्यंत्र रचकर प्रयास किए जा रहे हैं । इस विचार गोष्ठी में ‘सनातन संस्कृति की रक्षा’ जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर विचार मंथन हुआ । सभी को इस कार्यक्रम में सहभागी होने का आवाहन किया गया । संकलनकर्ता – श्री. प्रशांत जुवेकर, जळगांव

विचार गोष्ठी में सहभागी मान्यवर
हिन्दुत्वनिष्ठ विचारोंवाले, ओटीटी प्लेटफॉर्म’ ‘प्राच्यम्’ के प्रमुख कैप्टन प्रवीण चतुर्वेदीजी (सेवानिवृत्त), सहस्रों आदिवासियों की हिन्दू धर्म में सम्मानपूर्वक ‘घरवापसी’ करानेवाले भाजपा के छत्तीसगढ राज्य के नेता श्री. प्रबल प्रताप सिंह जूदेवजी, अरुणाचल प्रदेश के संस्कृति रक्षक तथा अरुणाचल प्रदेश बांस संसाधन एवं विकास संस्थान के उपाध्यक्ष श्री. कुरु थाईजी, गंगा नदी की रक्षा का कार्य करनेवाले ‘न्यायमित्र’ प्रयागराज (इलाहाबाद) उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार गुप्ताजी, साथ ही सबसे विशेष बात यह कि इस संवाद का संचालन करनेवाले प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ तथा हिन्दुत्व की बुलंद आवाज सुदर्शन न्यूज चैनल के मुख्य संपादक डॉ. सुरेश चव्हाणकेजी ने इस विचार गोष्ठी में भाग लिया ।

आस्था के केंद्रों का अनन्यसाधारण वैज्ञानिक महत्त्व रखना आवश्यक ! – वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार गुप्ता
‘गंगा नदी सनातनी हिन्दुओं के लिए ‘देवनदी’ हैं । उनके प्रति सभी में प्रखर आस्था है; परंतु हमारी अगली पीढी को अथवा विश्व को गंगाजी का अनन्य साधारण महत्त्व ध्यान में आए; इसके लिए प्रयासों के उच्चतम शिखर पर जाकर तथा प्रयोगशीलता से उनका वैज्ञानिक महत्त्व विश्व के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए’, इस विचार गोष्ठी में सहभागी वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार गुप्ताजी के विचारों से यह सूत्र ज्ञात हुआ । हमारे यहां वास्तुकला के विभिन्न प्रारूप हैं, जैसे प्राचीन मंदिर एवं पर्वत शृंखलाओं में बसे अनेक ऐसे स्थान हैं; जो हमारी आस्था के केंद्र हैं; परंतु वैज्ञानिक दृष्टि से विश्व को उन स्थानों की विशिष्टता एवं महत्त्व समझाने के लिए भारतीयों को अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास करने होंगे ।

संस्कृति रक्षकों को सनातनी हिन्दुओं को सहभागी करने का कौशल आत्मसात करना चाहिए ! – श्री. सुरेश चव्हाणके
श्री. सुरेश चव्हाणकेजी के उत्साहवर्धक एवं विषय का भान रखकर किए गए संचालन से इस संवाद को वास्तविक धार प्राप्त हुई ! उन्होंने मंच पर उपस्थित मान्यवरों को उनके कार्य के विषय में बताने का निवेदन किया । साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ‘जो अभिभावक उनके बच्चों को ‘नेटफ्लिक्स’ अथवा अन्य ओटीटी प्लेटफॉर्म्स दिखाएंगे, वे बच्चे भविष्य में निश्चित ही इन अभिभावकों को वृद्धाश्रम भेजेंगे; परंतु जो अभिभावक उनके बच्चों को ‘प्राच्यम्’ पर प्रसारित कार्यक्रम दिखाएंगे, वे बच्चे माता-पिता की सेवा करेंगे । ‘प्राच्यम्’ हिन्दू युवकों को महान भारतीय संस्कृति एवं इतिहास से जोडनेवाली कडी है । इस प्रकार हम जो कार्य कर रहे हैं, उसे हमें लोगों के सामने प्रभावी एवं दृढतापूर्ण पद्धति से रखना चाहिए ।’
श्री. चव्हाणके द्वारा किया गया आवाहन ! अंतिम लक्ष्य प्राप्त होने तक शांति से न बैठें !
मार्च २०२६ तक केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों का ‘नक्सलमुक्त भारत’ बनाने का लक्ष्य है । इस पर श्री. चव्हाणकेजी ने महत्त्वपूर्ण दृष्टिकोण देते हुए कहा, ‘मार्च २०२६ तक ‘लाल’ रंग के आतंकवाद से (अर्थात नक्सलवाद से) मुक्ति मिलेगी, यह अच्छा ही है; परंतु हमें देश को ‘हरे’ आतंकवाद से (जिहादी आतंकवाद से) मुक्त करने का भी लक्ष्य रखना होगा । इसके लिए सरकार अल्पसंख्यकों के विकास के नाम पर मुसलमानों के लिए जो ३६ से अधिक कल्याणकारी योजनाएं बनाकर उनके लाड कर रही है, सर्वप्रथम उन योजनाओं को बंद करना होगा । संकट के समय जिस प्रकार हिन्दू समर्थक राजनीतिक कार्यकर्ता पहल कर हिन्दू समर्थक सत्ता प्राप्त करते हैं, वैसे ही हिन्दू समर्थक कार्यकर्ताओं को सत्ता में आनेवाले हिन्दू समर्थक राजनेताओं से अपने कार्य करवाने का कौशल भी विकसित करना होगा । सबसे महत्त्वपूर्ण यह है कि केवल हिन्दू समर्थक राजनीतिक दलों को सत्ता तक पहुंचाकर शांति से न बैठते हुए, देश की सर्वांगीण रक्षा के लिए अंतिम लक्ष्य प्राप्त करने तक आप सक्रिय ही रहें ।

सावधान ! सांस्कृतिक युद्ध कब का आरंभ हो चुका है ! – कैप्टन प्रवीण चतुर्वेदी (सेवानिवृत्त)
‘किसी भी संस्कृति को नष्ट करने के लिए प्रथम उसके लोगों में प्रचंड हीन भावना निर्माण हो, इस प्रकार इतिहास उनकी अगली पीढी के सामने लाना पडता है, यह एक युद्ध है । विशेष बात यह है कि यह युद्ध सीमा पर नहीं, अपितु सीमा के अंदर लडा जा रहा है । इस युद्ध में शिक्षा संस्थान, प्रसारमाध्यम, ओटीटी प्लेटफॉर्म, फिल्म जगत आदि माध्यमों का कुशलता से उपयोग किया जाता है । इस युद्ध में व्यक्ति का शरीर नहीं मरता, अपितु आत्मा को ही मार डालने का काम किया जाता है । संक्षेप में, सांस्कृतिक युद्ध कब का आरंभ हो चुका है ।’ कैप्टन चतुर्वेदीजी (सेवानिवृत्त) के संबोधन से यह महत्त्वपूर्ण सूत्र स्पष्ट हुआ । उसके लिए हमने क्या तैयारी की है ?, यह देखना होगा ।

अरुणाचल प्रदेश के युवकों की भांति क्षात्रतेज होना आवश्यक ! – श्री. कुरू थाई
श्री. कुरू थाई ने कहा, ‘अरुणाचल प्रदेश में लव जिहाद एवं लैंड जिहाद के विषयों को लेकर व्यापक स्तर पर जागृति हो रही है । वहां बडी संख्या में अवैध मस्जिदें एवं मदरसे हैं । ‘राज्य सरकार ने अगले २ सप्ताह में इन अवैध निर्माणों को नहीं गिराया, तो हम उन्हें गिराएंगे’, राज्य के राष्ट्रनिष्ठ युवकों ने यह चेतावनी दी है । उसके लिए वहां के युवकों ने राज्यव्यापी अभियान छेड रखा है । अरुणाचल की पवित्र भूमि से ईसाई मिशनरियों एवं रोहिंग्या घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए अरुणाचल के ये शूर युवा पर्याप्त हैं ।’ यह सुनकर ऐसा लगा कि देश के युवकों को स्वयं में अरुणाचल प्रदेश के युवकों की भांति क्षात्रतेज जागृत करना आवश्यक है ।
‘पुरुषार्थ’ स्वयं ही करना पडता है !
‘सरकार कुछ नहीं करती, प्रशासन कुछ नहीं करता’, हम अधिकतर ऐसी भूमिका अपनाकर केवल आलोचना करते रहते हैं; परंतु हमें एक बात ध्यान में रखनी चाहिए कि पुरुषार्थ दूसरों के करने के लिए नहीं, अपितु स्वयं ही करना पडता है । छत्रपति शिवाजी महाराजजी ने किसी की शिकायत न करते हुए स्वयं पुरुषार्थ किया, पांडवों ने भगवान श्रीकृष्ण के मार्गदर्शन में पुरुषार्थ किया । हमें भी वही करना होगा ।
इस परिसंवाद (संगोष्ठी) से एक बात तो हृदय में स्थायी रूप से अंकित हो गई है, वह यह कि सांस्कृतिक युद्ध कब का आरंभ हो चुका है । हम अभी इसके मध्य में हैं; अब केवल विचार और चर्चा करने में समय गंवाने से कुछ नहीं होगा, अपितु हमें ठोस कार्ययोजना तैयार करनी होगी । तभी और तभी हमारा अस्तित्व सुरक्षित रहेगा, यह निश्चित है !’
– श्री. प्रशांत जुवेकर, जळगांव, महाराष्ट्र. (१७.१२.२०२५)
TMC Kolkata Mayor : कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के महापौर फिरहाद हकीम का त्यागपत्र (इस्तीफा) ।
Corporate Jihad : धर्मांतरण अस्वीकार करने के कारण ‘विप्रो’ (Wipro) की हिन्दू महिला कर्मचारी को सेवामुक्त किया !
मृतक के नाम पर अभियोग चलाकर मंदिर प्रशासन के विरुद्ध अचलपुर के तहसीलदार के द्वारा दिया गया आदेश न्यायालय ने किया निरस्त ।
परिवार व्यवस्था, धर्मसंस्था एवं शिक्षाप्रणाली को साम्यवाद से संकट !
अधिक मास अथवा पुरुषोत्तम मास का महत्त्व !
Nashik Love Jihad : नाशिक – मिजान शेख ने किया महाविद्यालयीन हिन्दू छात्रा का अपहरण !