Shankhnad Mahotsav Delhi : ‘रणसंवाद – भारत की सामरिक नीति’ विचारगोष्ठी !

सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव देहली २०२५

(बाईं ओर से) श्री. अशोक श्रीवास्तवजी, श्री. नीरज अत्रीजी, श्री. राहुल कौलजी, अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकरजी, श्री. चेतन राजहंसजी, ब्रिगेडियर संजय अग्रवालजी (सेवानिवृत्त), विंग कमांडर विनायक डावरेजी (सेवानिवृत्त) और कर्नल आर.एस.एन. सिंहजी (सेवानिवृत्त)

‘गजवा-ए-हिन्द’ के जवाब के रूप में वैचारिक ‘गजवा-ए-इस्लाम’ का आरंभ कीजिए ! – ‘रॉ’ के पूर्व अधिकारी कर्नल आर.एस.एन. सिंहजी का आवाहन

(गजवा-ए-हिंद अर्थात भारत के इस्लामीकरण के लिए युद्ध तथा गजवा-ए-इस्लाम अर्थात जिहादी मानसिकता के विरुद्ध वैचारिक युद्ध)

कर्नल आर्.एस्.एन्. सिंह

भारत मंडपम्, नई दिल्ली – हम सदैव यह मानकर चलते हैं कि पाकिस्तान एक भौगोलिक क्षेत्र है; परंतु हमें यह ध्यान में लेना चाहिए कि पाकिस्तान एक विचार है । मुसलमानों के २ प्रकार हैं, उनमें से एक हैं उपमहाद्वीपीय (सबकाँटिनेंटल) मुसलमान तथा अन्य हैं शेष मुसलमान ! उपमहाद्वीपीय मुसलमानों में से ९९ प्रतिशत मुसलमान नवधर्मांतरित हैं । विगत १ सहस्र ४०० वर्षों से ‘गजवा-ए-हिन्द’ के नारे लगाए जा रहे हैं । गजवा-ए-ब्रिटेन, गजवा-ए-जर्मनी जैसे नारे कभी भी लगाए नहीं जाते । क्या हम ये धमकियां सुनकर मिट जाएंगे ? ‘गजवा-ए-हिन्द’ के जवाब के रूप में वैचारिक ‘गजवा-ए-इस्लाम’ का आरंभ कीजिए, ऐसा आवाहन ‘रॉ’ एवं भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी कर्नल आर.एस.एन. सिंह (सेवानिवृत्त) ने किया । दिल्ली में हुए सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव में आयोजित ‘रणसंवाद – भारत की सामरिक नीति’ सत्र में वे ऐसा बोल रहे थे । इस अवसर पर ‘पाकिस्तान, चीन एवं तुर्की के विषय में भारत की नीति’, इस विषय पर कर्नल आर.एस.एन. सिंहजी ने देश के आंतरिक बडे संकट का भान कराते हुए कहा, ‘‘हमारे देश के अंदर भी एक पाकिस्तान है । हम प्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चला सकते हैं; परंतु हम देश के अंदर के पाकिस्तान का क्या करेंगे ? भारत-पाकिस्तान सीमा पर हमने घेरा डाला है । पाकिस्तानियों को ऐसा घेरा बनाने की आवश्यकता नहीं पडी; क्योंकि हमारे विचारों से उन्हें कोई खतरा नहीं है । अब दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘एस.आई.आई.’ के विरुद्ध आंदोलन चलानेवालों को इन अंदर के पाकिस्तानियों का समर्थन प्राप्त है । जब हम भारतीय राजनीति का विचार करते हैं, तब यह दिखाई देता है यहां के देशद्रोहियों की तथा अंदर के पाकिस्तानियों की सहायता ली, तो सत्ता में रहा जा सकता है । हमारे अंदर के पाकिस्तानी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के कारण दुखी थे; इसलिए अब इनके विरुद्ध वैचारिक स्तर पर ‘गजवा-ए-इस्लाम’ का नारा लगाने की आवश्यकता है ।

प्रत्येक सैनिक सनातन राष्ट्र के लिए लडता है ! – विंग कमांडर विनायक डावरेजी (सेवानिवृत्त)

सीमा पर देश के लिए लडनेवाले सैनिक की आस्था क्या होती है ? प्रत्येक प्रशिक्षण के समय भारतीय सैनिक में राष्ट्रीयता एवं राष्ट्रभक्ति जगाई जाती है । प्रत्येक सैनिक पहले राष्ट्र के लिए लडता है, उसके पश्चात अपनी पलटन के लिए और उसके उपरांत वह अपने लिए लडता है । प्रत्येक पलटन का घोषवाक्य होता है, उदा. ‘राजपूताना राइफल्स’ का घोषवाक्य ‘बजरंग बली हनुमान की जय’ । इन नारों से ही ध्यान में आता है कि प्रत्येक सैनिक सनातन राष्ट्र के लिए लडता है ।

शत्रु राष्ट्रों का आक्रामक प्रतिकार करना आवश्यक ! – ब्रिगेडियर संजय अग्रवालजी (सेवानिवृत्त)

ब्रिगेडियर संजय अग्रवाल (निवृत्त)

वर्ष १९६२ में चीन के साथ हुए युद्ध में हमारी पराजय हुई थी, ऐसा बताया जाता है; परंतु उसके ५ वर्ष उपरांत ही अर्थात वर्ष १९६७ में हमने चीन को पराजित किया था; इन वास्तविकताओं की बहुत-कुछ चर्चा नहीं होती । हम अपने बलस्थान भूल चुके हैं । ‘किसी भी शत्रु देश के विषय में हमारी नीति क्या होनी चाहिए ?’, यह कभी भी स्पष्ट नहीं करना चाहिए । शत्रु राष्ट्रों का आक्रामक प्रतिकार करना आवश्यक है ।

क्या हम घुसपैठियों के लिए लाल कालीन बिछाएं ? – अशोक श्रीवास्तवजी

यदि मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया की जा रही है, तो उसका स्वागत है । घुसपैठ रोकने के लिए यदि प्रक्रिया हो रही है, तो उसमें क्या समस्या है ? हिन्दुओं के पक्ष में निर्णय देनेवाले न्यायाधीश के विरुद्ध महाभियोग चलाने की भाषा बोली जा रही है । महाभियोग चलाने की भाषा बोलनेवाले पाकिस्तान के नहीं हैं, अपितु वे हिन्दुओं के मतों से चुनाव जीतकर आए हैं । उन्हें उनकी गलती का भान कराना आवश्यक है ।

हिन्दुओं को हिन्दू राष्ट्र की मांग निरंतर करते रहना चाहिए ! – अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर

अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर

साम्यवाद व अर्बन नक्सलवाद एक ही हैं । अर्बन नक्सलवाद सहज समाप्त नहीं होगा । उसके लिए हर एक को सीमा पर कार्यरत सैनिक की भूमिका निभानी चाहिए । जब इजरायल नहीं बना था, तब ज्यू लोग प्रतिवर्ष एकत्रित आकर कहते, ‘अगले वर्ष इजरायल में मिलेंगे ।’ वे सपना देख रहे थे । हमें भी हिन्दू राष्ट्र की मांग निरंतर करते रहना चाहिए ।

…तो ही कश्मीर में भारत की घरवापसी – राहुल कौलजी

श्री. राहुल कौल

वर्ष १९४७ तक धर्म के सूत्र पर कश्मीरी हिन्दुओं का ५ बार पलायन हुआ था । हम जिहाद को ‘जिहाद’ बोलने के लिए डरते हैं । हम उसे ‘आतंकवाद’ बोलते हैं । कश्मीर के हिन्दुओं का कश्मीर घाटी में लौटना ही कश्मीर में भारत की घरवापसी है । जब कश्मीर में कश्मीरी हिन्दुओं की घरवापसी होगी, तभी भारत में हिन्दुओं की संस्कृति पुनर्जीवित होगी ।

अपनी क्षमता के अनुरूप धर्म हेतु कार्य करो ! – नीरज अत्रीजी

मुंबई आक्रमण के समय पुलिसकर्मी तुकाराम ओंबाळे के हाथ में केवल लाठी थी । उसकी सहायता से उन्होंने कसाब को पकडा तथा उस समय तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा रचे गए भगवा आतंकवाद का षड्यंत्र नष्ट हुआ तथा कांग्रेस की सत्ता ध्वस्त हुई । इस कृति ने इतिहास की दिशा बदल दी । उसके कारण आप अपनी क्षमता के अनुरूप धर्म के लिए कार्य करते रहिए ।