हिन्दू धर्म को बांटोगे, तो याद रखिए : मैं हिमालय की भांति खडा हूं ! – HH Kadsiddheshwar Swami

कोल्हापुर के सिद्धगिरी मठ के मठाधिपति प.पू. काडसिद्धेश्वर स्वामीजी ने कहा कि वीरशैव एवं लिंगायत भिन्न न होकर वे एक ही हैं । हम पहले हिन्दू हैं तथा उसके उपरांत हम वीरशैव एवं लिंगायत हैं ।

Shankhnad Mahotsav Delhi : सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव का समापन सत्र : सनातन राष्ट्र संकल्पसभा

चरित्रवान लोग ही धर्मयुद्ध कर सकते हैं । जिनके पास चरित्र नहीं है, वे युद्ध नहीं जीत सकते । भारत के पास चरित्र होने के कारण पाकिस्तान के विरुद्ध के अनेक छोटे-बडे युद्धों में भारत को सफलता मिली । चरित्रनिर्माण सरल नहीं है तथा चरित्र का शिक्षा से कोई भी संबंध नहीं है ।

Goa PM Modi : विकसित भारत के लिए अध्यात्म, राष्ट्रसेवा और विकास में समन्वय आवश्यक !

इस अवसर पर श्रीमद् विद्याधीश तीर्थ श्रीपाद वडेर स्वामीजी ने कहा, “देश के प्रधानमंत्री और स्वयं को ‘प्रधान सेवक’ कहने वाले नरेंद्र मोदीजी की उपस्थिति के कारण आज का दिन मठ के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चातुर्मास व्रत का एकभुक्त रहकर पालन करते हैं और नवरात्र में उपवास भी करते हैं ।

RSS Dr. Mohanji Bhagwat : यदि हिन्दुओं का अस्तित्व समाप्त हो गया, तो विश्व समाप्त हो जाएगा !

हिन्दू समाज समय-समय पर विश्व को धर्म का योग्य अर्थ बताता है एवं उसका मार्गदर्शन करता है । यह हमारा ईश्वर प्रदत्त कर्तव्य है, ऐसा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत ने कहा ।

Devkinandan Thakurji : सनातन संस्कृति के पुनरुत्थान हेतु ‘सनातन बोर्ड’का गठन कीजिए ! – कथावाचक देवकीनंदन ठाकूर

सनातन संस्कृति के पुनरुत्थान हेतु हरिद्वार में २१ नवंबर को ‘विश्व सनातन महापिठा’का शिलान्यास समारोह उत्साहित वातावरण में संपन्न हुआ । इस समारोह में बोलते हुए कथावाचक देवकीनंदन ठाकूर ने यह मांग की ।

श्री चित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी की अमूल्य विचारसंपदा !

स्वभावदोष एवं अहं निर्मूलन की प्रक्रिया गंभीरता से, लगन के साथ तथा आनंद से की, तो १० से १५ दिन में ही प्रक्रिया कर रहे साधक के चेहरे में अच्छा परिवर्तन प्रतीत होता है ।

‘गर्भावस्था में ही शिशु को सुसंस्कारित करने का महत्त्व’, इस विषय में श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी द्वारा बताए गए मौलिक सूत्र

गर्भावस्था में ही यदि शिशु को साधना के संस्कार दिए गए, तो उससे पूर्वजन्म के संस्कार नष्ट होने में सहायता मिलती है !

भक्तिसत्संग में श्रीसत्‌शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी द्वारा किया गया अमूल्य मार्गदर्शन

‘ईश्वर की लीला से विधि का विधान जीव को जन्म-मृत्यु के चक्र में संलिप्त करता है, जबकि उस घोर बंधन से मुक्त होने हेतु साधना सिखाकर उस चक्र से मुक्त करनेवाले केवल गुरु ही होते हैं !’

सनातन संस्कृति की शिक्षा ही वास्तविक शिक्षा है ! – सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळे

मनुष्य योनि सर्व योनियों में सर्वोच्च है । मनुष्य योनि में जन्म लेने के उपरांत व्यक्ति के इस जन्म का उद्देश्य क्या है ? तथा उसे वह कैसे साध्य करे, यह प्रश्न निर्माण होने पर ही मनुष्य के जन्म की यात्रा आरंभ होती है ।

आध्यात्मिक स्तर पर मार्गदर्शन कर साधक को अगले स्तर तक ले जानेवाली श्रीसत्‌शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी !

‘‘सनातन संस्था तथा आप अलग नहीं हैं । आप एक ही हैं ।’’ उनकी बातें सुनकर मेरे अंतर्मन में श्री गुरुदेवजी ने मेरे मन में आए पहले विचार में जो अधूरापन था, उसका भान दिलाया ।