पुणे में हत्या के प्रयास के प्रकरण में पुलिस अधिकारियों तथा कर्मचारियों के विरुद्ध प्रकरण प्रविष्ट किया गया है !
इस प्रकरण में गहन जांच के उपरांत यदि पुलिस दोषी पाई जाती है तो उन्हें सरकार द्वारा कडा दंड दिया जाना चाहिए !
इस प्रकरण में गहन जांच के उपरांत यदि पुलिस दोषी पाई जाती है तो उन्हें सरकार द्वारा कडा दंड दिया जाना चाहिए !
बिहार सरकार की, हिन्दू द्रोह के कारण आलोचना होने के कारण एक धर्मनिरपेक्ष देश में धर्म के अनुसार भिन्न-भिन्न छुट्टियाँ क्यों ? इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए देश में शीघ्र अति शीघ्र एक समान नागरिक कानून बनाना आवश्यक है !
देशविरोधी एवं हिन्दू धर्मविरोधी बातों पर कार्रवाई कर, उसे कैसे समूल नष्ट करना है, इसका आदर्श उत्तरप्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इस प्रकरण से हिन्दुओं के सामने रखा है । ऐसे ही शासनकर्ताओं की हिन्दुओं को आवश्यकता है, ऐसे यदि हिन्दुओं को लगता है तो इसमें गलत क्या है ?
“क्या महाराष्ट्र सरकार को नहीं पता कि हलाल अर्थव्यवस्था भारतीय अर्थव्यवस्था को नष्ट कर रही है ?”, यह प्रश्न आम जनता के मन में है !
इस्लाम का अपमान होता है तो पुलिस में वैध मार्ग से शिकायत कर संबंधित पर कार्रवाई करने की मांग करने के स्थान पर कट्टर मुसलमान सीधे कानून हाथ में लेकर हत्या कर देते हैं ! परंतु, ध्यान दें कि देश के कानून-प्रेमी, धर्मनिरपेक्षतावादी, पुरो (अधो) गामी, इस बारे में अपना मुँह तक नहीं खोलते हैं !
न्यायालय ने आगे कहा कि राज्यपाल कानून बनाने की सामान्य प्रक्रिया को बाधित करने के लिए अपनी शक्तियों का उपयोग नहीं कर सकते ।
किलों को सुरक्षित रखना तो दूर, उलटे उनके सामने शौचालय बनवाना, यह प्रशासन की हिन्दू द्वेष ही है ! सरकार को इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए !
‘डीपफेक वीडियो’, सिंथेटिक वीडियो (मूल चित्र बदलकर बनाया गया वीडियो) और झूठे वृत्त प्रसारित करने वाले प्रयोगकर्ताओं पर कार्यवाही नहीं की, तो इसके लिए सामाजिक माध्यम ही उत्तरदायी होंगे ।
भारत में किसी अवैध मस्जिद के विषय में ऐसा करने का साहस प्रशासन कभी दिखा सकेगा ?
अन्न सुरक्षा और औषध प्रशासन की ओर से संपर्क के लिए शीघ्र ही एक दूरभाष संख्या जारी की जाएगी । इस संपर्क सूत्र पर नागरिक हलाल प्रमाणित वस्तुओं के विषय में जांच-दल को जानकारी दे सकेंगे ।