Jalgaon School ID Scam : तत्कालीन शिक्षाधिकारी ने २५९ झूठे (फर्जी) आदेश दे कर किया करोडों रुपए का भ्रष्टाचार ।

जलगांव (महाराष्ट्र) का शालार्थ आईडी घोटाला –

क्या है शालार्थ आईडी ?

शालार्थ आईडी महाराष्ट्र सरकार के विद्यालयीन शिक्षा एवं खेल विभाग के द्वारा सरकारी एवं अनुदानित विद्यालयों के शिक्षकों एवं गैरशिक्षा कर्मचारियों को वेतन प्राप्त करने के लिए दिया जानेवाला एक विशिष्ट पहचान क्रमांक है । यह क्रमांक मिले बिना सरकार से नियमित वेतन नहीं मिलता । इसके अंतर्गत किए गए घोटाले में आईडी के आधार पर कुछ लोगों ने सरकारी वेतन हडप लिया, जिसके कारण सरकार को बहुत आर्थिक हानि उठानी पडी ।

नासिक : विशेष अन्वेषण दल (SIT) ने जिला परिषद के शिक्षा विभाग में १६० करोड रुपए का ‘शालार्थ आईडी’ घोटाला उजागर किया है । तत्कालीन शिक्षाधिकारी शशिकांत हिंगोणेकर ने अपने अधिकार का अनुचित लाभ उठाकर कोई सरकारी प्रक्रिया अपनाए बिना झूठे (फर्जी) कागदपत्रों के आधार पर २५९ शिक्षकों एवं गैरशिक्षक कर्मचारियों की नौकरियों को सहमति दी, यह स्पष्ट हुआ है । इस घोटाले में दिए गए कुल ८४१ फर्जी आदेशों में से सबसे अधिक आदेश हिंगोणेकर के कार्यकाल में लिए गए हैं । अब इस प्रकरण में ‘संगठित अपराध’ का (मकोका जैसा कठोर कानून) की धारा लगाई गई है ।

१. २८ अगस्त २०११ से जून २०२५ की अवधि में जलगांव जिले के विविध विद्यालयों में कार्यरत २५९ शिक्षकों एवं कर्मचारियों के ल किए गए शालार्थ आदेश फर्जी होने की बात सिद्ध हुई है ।

२. फर्जी शालार्थ आईडी बनाकर संबंधित कर्मचारियों का नियमित वेतन एवं बडी बकाया धनराशि हडप ली गई ।

३. जलगांव के ३६८ कर्मचारियों में से ११६ लोगों के कागदपत्र शालार्थ प्रणाली पर अपलोड ही नहीं किए गए थे ।

४. इस घोटाले में केवल शिक्षाधिकारी ही नहीं, अपितु शिक्षा विभाग के उपनिदेशक कार्यालय के अधिकारी – कर्मचारी, शिक्षा संस्थान चलानेवाले, प्रधानाध्यापक, दलाल एवं बडे राजनेता भी संलिप्त होने की बात सामने आई है ।

संपादकीय भूमिका

इस प्रकरण में संलिप्त सभी को ही कठोर दंड देकर उनसे ब्याजसहित दंडात्मक वसूली की जानी चाहिए ।