तथाकथित अदीना मस्जिद के पास आरंभ की पूजा

मालदा (बंगाल) – मालदा जिले के पांडुआ में स्थित लगभग ६५० वर्ष पुरानी तथाकथित अदीना मस्जिद के पास भाजपा के स्थानीय नेताओं के समर्थन से एक हिन्दू संगठन ने पूजा करना आरंभ कर दिया है । ‘आदिनाथ पुरातन शिव मंदिर’ संगठन ने घोषणा की कि वे मस्जिद परिसर के बाहर ३.६ फीट ऊंचा एवं लगभग १.५ टन वजनी शिवलिंग स्थापित करेंगे । यह शिवलिंग तारकेश्वर से लाया जा रहा है, जो यहां से लगभग २८९ किलोमीटर दूर है ।
आदिनाथ मंदिर तोडकर बनाई गई मस्जिद
संगठन के मुख्य संरक्षक एवं भाजपा नेता श्री काजोल गोस्वामी ने कहा कि इस तथाकथित मस्जिद में हिन्दू एवं बौद्ध धर्म की मूर्तियां हैं । आदिनाथ मंदिर को तोडकर यहां मस्जिद बनाई गई थी । मंदिर को पुन: स्थापित करना तथा शिवलिंग को उसके भीतर रखना हमारा उद्देश्य है । हमारा संगठन कानून का पूरी तरह से पालन करेगा । भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग एवं पुलिस अधिकारियों ने उन्हें संरक्षित स्मारक क्षेत्र के बाहर ही पूजा करने के निर्देश दिए हैं ।
पुरातत्व विभाग द्वारा नियमावली जारी
इन घटनाक्रमों के पश्चात मालदा जिला पुलिस ने कडे नियम जारी किए । पुलिस ने लोगों को स्मरण दिलाया कि अदीना स्मारक वर्ष १९५८ के प्राचीन ‘स्मारक एवं पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम’ के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा ‘संरक्षित स्मारक’ घोषित है । इसलिए परिसर के भीतर अनुमति के बिना किसी भी प्रकार की पूजा या धार्मिक अनुष्ठान करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है ।
भाजपा ने संसद में उठाया सूत्र
भाजपा के राज्यसभा सांसद समित भट्टाचार्य ने संसद में यह सूत्र उठाते हुए केंद्र सरकार एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से मूल आदिनाथ मंदिर के संरक्षण पर ध्यान देने की मांग की । दूसरी ओर माकपा की कार्यकारिणी के सदस्य मोहम्मद सलीम ने आरोप लगाया कि भाजपा आगामी चुनावों से पहले लोगों को बांटने के लिए अपनी पुरानी राजनीतिक रणनीति का उपयोग कर रही है ।
आदिनाथ मंदिर का इतिहास
अदीना मस्जिद के विषय में सरकारी कागदपत्रों (दस्तावेजों) में प्रविष्ट है कि इसका निर्माण वर्ष १३७३ से १३७५ के दौरान सुल्तान सिकंदर शाह ने करवाया था । हालांकि, कई पुरातात्विक एवं वास्तुशिल्प साक्ष्य दर्शाते हैं कि इस स्थान का इतिहास उससे कहीं अधिक पुराना है । इसका निर्माण मुख्य रूप से पाल-सेन काल (८वीं से १२वीं शताब्दी) के पूर्व-रहे हिन्दू एवं बौद्ध धार्मिक स्थलों से लाए गए पत्थरों, खंभों एवं नक्काशीदार सामग्री का उपयोग करके किया गया था ।
मस्जिद में कई मूर्तियां एवं अन्य अवशेष दर्शाते हैं कि यहां पहले एक भव्य आदिनाथ मंदिर और भगवान विष्णु का एक मंदिर रहा था । मस्जिद का मिंबर (जहां से इमाम संबोधित करते हैं) भी काले बेसाल्ट पत्थर से बने ऐसे ही एक दरवाजे का उपयोग करके बनाया गया है, जो मंदिर के अवशेषों से लिया गया था । यहां की दीवारों, दरवाजों एवं मेहराबों पर भगवान शिव, भगवान गणेश तथा अन्य हिन्दू प्रतीकों की नक्काशी दिखाई देती है । यहां फूलों की आकृतियां, चैत्य मेहराब, कीर्तिमुख, मोतियों की माला और सांकल-घंटी जैसी कई नक्काशी भी है । इस प्रकार का सजावटी काम आमतौर पर इस्लामी वास्तुकला का अंग नहीं माना जाता है । इसलिए यह नक्काशी एवं बनावट पाल-सेन काल की मानी जाती है । आज भी इस परिसर में और इसके आसपास की दीवारों में टूटे हुए शिवलिंग एवं उखडी हुई हिन्दू देवताओं की मूर्तियां दिखाई देती हैं ।
अधिवक्ता पू. हरि शंकर जैन ने प्रधानमंत्री मोदीजी को लिखा था पत्र

वरिष्ठ अधिवक्ता पू. हरि शंकर जैन ने हिन्दुओं से इस स्थान पर पूजा करने का अधिकार वापस पाने का आह्वान किया । उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी को पत्र लिखकर सुल्तान सिकंदर शाह के शासनकाल में हुए ऐतिहासिक विनाश का सूत्र भी उठाया ।
UP Conversion Racket : लखनऊ (उत्तर प्रदेश) – धर्मांतरण कराने वाले गिरोह के ७ लोग गिरफ्तार !
सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकनेवालों के विरुद्ध अपराध पंजीकृत कीजिए ।
Budaun Love Jihad : अपहरण, दुष्कर्म एवं धर्मांतरण के प्रयास प्रकरण में शाकिर हुसैन को १० वर्ष की सश्रम कैद
CJP Protest Ended : कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन समाप्त
Bangladesh Terror Attack Threat : ढाका (बांग्लादेश) में जगन्नाथ रथयात्रा में बम विस्फोट करने का प्रयास उजागर
NEET Paper Leak : आपकी वजह से देश की अपकीर्ति (बदनामी) हुई, करोडों रुपयों का नुकसान हुआ !