Exam Paper Leak : विगत १२ वर्षों में ११६ प्रश्न-पत्र लीक : साढे सात करोड अभ्यर्थियों पर पडा प्रभाव

देश के १९ राज्यों में प्रश्न-पत्र लीक करने वाले माफिया

नई दिल्ली – जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का ‘नीट’ प्रश्न-पत्र लीक के विरोध में चल रहा आंदोलन यद्यपि समाप्त हो गया है, तथापि वर्ष २०१४ से जुलाई २०२६ तक प्रश्न-पत्र लीक होने के न्यूनतम ११६ प्रकरण सामने आए हैं । इन प्रकरणों के कारण लगभग साढे सात करोड अभ्यर्थियों को कष्ट सहन करना पडा । इन प्रश्न-पत्र लीक करने वाले माफियाओं का जाल १९ राज्यों में विस्तृत है ।

१. वर्ष २०१४ से २०२४ की कालावधि में ८९ प्रकरण सामने आए थे । इनमें से २१ केंद्रीय संस्थाओं से तथा ६८ राज्यस्तरीय परीक्षाओं से सम्बंधित थे । तत्पश्चात् वर्ष २०२५ में २० तथा २०२६ में जुलाई तक ‘नीट-यूजी’ सहित प्रश्न-पत्र लीक के ७ प्रकरण पंजीकृत किए गए ।

२. जनवरी २०१९ से जून २०२४ की कालावधि में देशभर के १९ राज्यों में ६५ परीक्षाओं के प्रश्न-पत्र लीक हुए । इनमें शासकीय भर्ती से लेकर प्रवेश, बोर्ड एवं विश्वविद्यालय की परीक्षाओं का समावेश है । इन ६५ प्रकरणों में से ४५ शासकीय भर्ती परीक्षाओं से सम्बंधित थे । प्रश्न-पत्र लीक होने के कारण न्यूनतम २७ परीक्षाएं निरस्त अथवा स्थगित की गईं । इससे ३ लाख से अधिक शासकीय पदों पर भर्ती बाधित हुई । शिक्षक एवं आरक्षी (पुलिस) भर्ती परीक्षाएं सर्वाधिक लक्ष्य थीं ।

३. प्रश्न-पत्र लीक के उत्तर प्रदेश में ११, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में प्रत्येक में ९, महाराष्ट्र में ६ तथा गुजरात में ५ प्रकरण पंजीकृत किए गए ।

४. केंद्र सरकार की विद्यालयीन परीक्षाएं, केंद्रीय विद्यालय संगठन, संघ लोक सेवा आयोग, सेना, कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल जैसी ८ भर्ती परीक्षाएं निरस्त करनी पडी । इससे भर्ती प्रक्रिया २ से ८ मास तक विलंबित हुई ।

५. वर्ष २०२५ – २६ में बोर्ड, भर्ती, पात्रता, विश्वविद्यालय एवं चिकित्सा प्रवेश परीक्षाओं के प्रश्न-पत्र निरंतर लीक होते रहे ।

६. ‘नीट’ प्रश्न-पत्र लीक के पश्चात् २१ छात्रों की आत्महत्याओं एवं शिक्षण व्यवस्था की त्रुटियों के कारण शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को त्याग-पत्र देने हेतु विवश होना पडा ।

संपादकीय भूमिका

प्रश्न-पत्र लीक करने वालों को अब मृत्युदंड (फांसी) का ही दंड देने हेतु नियम (कानून) में परिवर्तन करना आवश्यक हो गया है !