बांग्लादेश में आत्मसमर्पण करते समय लज्जा नहीं आई क्या ? -Maulana Fazlur Rahman

मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तानी सेना से पूछा प्रश्न

(मौलाना अर्थात इस्लाम का विद्वान )

मौलाना फजलुर रहमान

इस्लामाबाद (पाकिस्तान) – पाकिस्तान के इस्लामी दल ‘जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फजल)’ के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने पुनः एक बार पाकिस्तानी सेना के नेतृत्व को लक्ष्य बनाया । ‘मौलाना डिजल’ नाम से प्रसिद्ध फजलुर रहमान ने कहा कि, ‘जब पाकिस्तानी सेना ने बांग्लादेश में भारतीय सेना के समक्ष आत्मसमर्पण किया था, तब उन्हें लज्जा नहीं आई क्या ?’ इससे पूर्व मौलाना फजलुर ने ‘यदि राजनीति ही करनी है, तो वर्दी त्यागकर निर्वाचन लडें’, ऐसा सेनाधिकारियों को आह्वान किया था ।

देश की रक्षा का उत्तरदायित्व प्रजा का नहीं, अपितु वेतन लेने वाले सैनिकों का !

आतंकवाद से युद्ध करने हेतु सामान्य नागरिकों के सशस्त्र गुट सिद्ध करने की मांग को उन्होंने अस्वीकार कर दिया । एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि, देश की रक्षा का उत्तरदायित्व सामान्य नागरिकों का न होकर शासकीय संस्थाओं का है । आप (सेना) मुझ पर अपने रक्त का उपकार क्यों दर्शा रहे हैं ? आपके सैनिकों ने इसी हेतु वर्दी धारण की है । आप हमारे कठिन परिश्रम से अर्जित धन पर दिए गए कर से अपना वेतन प्राप्त करते हैं तथा फिर हमसे ही शस्त्र उठाकर उनसे युद्ध करने को कहते हैं । मैंने कोई वेतन ग्रहण नहीं किया है । मैं कोई भी सशस्त्र गुट नहीं बनाऊंगा ।

संपादकीय भूमिका

केवल आत्मसमर्पण ही नहीं किया था, अपितु उनके वस्त्र उतरवाए गए थे । भारत ने आत्मघाती दया दर्शाते हुए ९२ सहस्र पाकिस्तानी सैनिकों को मुक्त कर दिया था !