मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तानी सेना से पूछा प्रश्न
(मौलाना अर्थात इस्लाम का विद्वान )

इस्लामाबाद (पाकिस्तान) – पाकिस्तान के इस्लामी दल ‘जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फजल)’ के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने पुनः एक बार पाकिस्तानी सेना के नेतृत्व को लक्ष्य बनाया । ‘मौलाना डिजल’ नाम से प्रसिद्ध फजलुर रहमान ने कहा कि, ‘जब पाकिस्तानी सेना ने बांग्लादेश में भारतीय सेना के समक्ष आत्मसमर्पण किया था, तब उन्हें लज्जा नहीं आई क्या ?’ इससे पूर्व मौलाना फजलुर ने ‘यदि राजनीति ही करनी है, तो वर्दी त्यागकर निर्वाचन लडें’, ऐसा सेनाधिकारियों को आह्वान किया था ।
"Did you not feel ashamed when you surrendered in Bangladesh?" – Pakistan's JUI-F chief Maulana Fazlur Rehman's scathing attack on Pakistan Military
✍🏻 It was not merely a surrender, it stripped Pakistan's military of every shred of pride. Yet India, in an act of suicidal mercy,… pic.twitter.com/CaUKe2PsCW
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) July 25, 2026
देश की रक्षा का उत्तरदायित्व प्रजा का नहीं, अपितु वेतन लेने वाले सैनिकों का !
आतंकवाद से युद्ध करने हेतु सामान्य नागरिकों के सशस्त्र गुट सिद्ध करने की मांग को उन्होंने अस्वीकार कर दिया । एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि, देश की रक्षा का उत्तरदायित्व सामान्य नागरिकों का न होकर शासकीय संस्थाओं का है । आप (सेना) मुझ पर अपने रक्त का उपकार क्यों दर्शा रहे हैं ? आपके सैनिकों ने इसी हेतु वर्दी धारण की है । आप हमारे कठिन परिश्रम से अर्जित धन पर दिए गए कर से अपना वेतन प्राप्त करते हैं तथा फिर हमसे ही शस्त्र उठाकर उनसे युद्ध करने को कहते हैं । मैंने कोई वेतन ग्रहण नहीं किया है । मैं कोई भी सशस्त्र गुट नहीं बनाऊंगा ।
भारत-नेपाल सीमा से प्रवेश करने का प्रयास करने वाला खालिस्तानी अलगाववादी अमेरिकी नागरिक सहित बन्दी ।
अमेरिका ने भारत पर लगाया १० प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क
Bangladesh Foreign Affairs Minister : (और इनकी सुनिए) “विश्व का सबसे बडा लोकतंत्र भारत अपने नागरिकों की समस्याओं पर ध्यान देगा, ऐसी आशा है ।”
Assam Flood : असम में भीषण बाढ – ४१ लोगों की मृत्यु ।
Taslima Nasreen : जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन से बांग्लादेश के हिंसक आंदोलन की याद आ गई ! — तस्लीमा नसरीन
मुझे फांसी दी जा सकती है, यह ज्ञात होने पर भी मैं बांग्लादेश लौटूंगी ! — शेख हसीना