
१. श्री. कमल बिश्वास को संतों के इस दौरे की स्वप्न में मिली पूर्वसूचना ।
छत्तीसगढ में सनातन संस्था के कार्य से नए सिरे से जुडे एक धर्मप्रेमी श्री. कमल बिस्वास को इस दैवी दौरे से ८ दिन पूर्व ही स्वप्न में एक दृश्य दिखाई दिया । उन्हें स्वप्न में श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबालजी ‘छत्तीसगढ में धर्मकार्य कैसे बढाना चाहिए तथा साधना कैसी करनी चाहिए’, इस विषय में सभी साधकों एवं धर्मप्रेमियों का मार्गदर्शन करती हुईं दिखाई दीं । उन्होंने जब इस स्वप्न के विषय में सूचित किया, उस समय यह दौरा वास्तव में सुनिश्चित नहीं हुआ था, परंतु उसके २ दिन उपरांत ही प.पू. डॉ. युधिष्ठिरलाल महाराज के निमंत्रण पर यह दौरा सुनिश्चित हुआ । इससे ईश्वर का सूक्ष्म नियोजन कैसे होता है तथा साधकों एवं धर्मप्रेमियों की कैसे पहले ही इसकी पूर्वसूचना मिलती है, यह बात सभी के ध्यान में आई ।
सैकडों किलोमीटर दूर संतों को सूक्ष्म से ज्ञान मिलकर उनके शिष्य अधिवक्ता आशिष शर्मा को सद्गुरुद्वयी के सान्निध्य में रहने के लिए कहा जाना !
भिलाई के अधिवक्ता आशिष शर्मा इस दौरे में सद्गुरुद्वयी के साथ थे । उनके गुरु हिंगणघाट (जिला वर्धा, महाराष्ट्र) के हैं तथा उन्होंने अधिवक्ता आशिष शर्मा को दूरभाष कर सूचित किया, ‘‘अब आपके सहित जो दो महान विभूतियां हैं, वे साक्षात् श्री सरस्वतीमाता एवं श्री महालक्ष्मीमाता हैं । आप उनसे कृपाशीर्वाद प्राप्त करें तथा आप अधिक से अधिक उनके सान्निध्य में रहें ।’’ ‘सैकडों किलोमीटर दूर संतों को सूक्ष्म से यह ज्ञान मिलना तथा उनके द्वारा उनके शिष्य को (अधिवक्ता आशिष शर्मा को) यह बताया जाना दैवी योजना का ही अंश होने की बात ध्यान में आई ।
दूसरे दिन अधिवक्ता आशिष शर्मा को उनके गुरुदेवजी ने दूरभाष कर पुनः बताया, ‘‘हिमालय के एक महान सद्गुरु हैं तथा ये दोनों माताजी उनकी शिष्याएं हैं, ऐसा मुझे दिखाई दे रहा है । ये दोनों माताजी देवियों के ही रूप हैं तथा उनकी आध्यात्मिक ऊर्जा बहुत बडे स्तर पर कार्यरत है ।’’
२. संतों के चैतन्य से प्रभावित प्रतिष्ठित उद्यमी अधिवक्ता आशिष शर्मा ने सकारात्मक रहकर अनेक उद्यमियों को सद्गुरुद्वयी के दर्शन हेतु निमंत्रित किया ।
सद्गुरुद्वयी के सान्निध्य में आने पर सभी उद्यमियों ने कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘यहां आकर हमारा भाग्य खिल गया । इससे आगे हम इस ईश्वरी कार्य के साथ निरंतर जुडे रहेंगे ।’’
‘बिजनेस नेटवर्क इंटरनैशनल’, इस उद्यमियों के संगठन के उपाध्यक्ष तथा उनके सहयोगी पहली बार ही सद्गुरुद्वयी के दर्शन के लिए आए थे । सद्गुरुद्वयी का अस्तित्व तथा उनके सहजता से बातें करने से वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अत्यंत विनम्रतापूर्वक चरणों पर मस्तक रखकर दर्शन किए । ‘ऐसे संतों के आशीर्वाद मिलना हमारा सौभाग्य है । इसके आगे संस्था के धर्मकार्य में हमारा सदैव ही सहयोग रहेगा ।’, ऐसा उन्होंने कहा । इसके साथ ही गोवा में होनेवाली आगामी उद्यमी परिषद में आयोजित शिविर के समय आश्रम से भेंट करने की उन्होंने इच्छा व्यक्त की ।
३. साधना के संदर्भ में मार्गदर्शन लेने आए छत्तीसगढ के उच्चपदस्थ अधिकारी ।
छत्तीसगढ राज्य के एक उच्चपदस्थ अधिकारी स्वयं अत्यंत सादगीपूर्ण एवं आध्यात्मिक प्रवृत्ति के हैं । वे सवेरे ही सद्गुरुद्वयी से मिलने आए थे । उन्होंने ‘साधना कैसे करनी चाहिए एवं स्वभावदोष निर्मूलन प्रक्रिया कैसे अपनाएं’, इसे आत्मियता के साथ समझ लिया । उसके पश्चात उन्होंने सद्गुरुद्वयी के मार्गदर्शन के अनुसार नियमित रूप से साधना करने का निश्चय किया ।
४. बिना किसी योजना के छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री की अत्यंत भावपूर्ण एवं सकारात्मक वातावरण में भेंट हुई ।
छत्तीसगढ के ‘अखिल भारतीय घरवापसी अभियान’के प्रमुख तथा भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री. प्रबल प्रतापसिंह जुदेव के तत्त्वावधान में राज्य के माननीय मुख्यमंत्री श्री. विष्णुदेव साय से सद्गुरुद्वयी से मिले । इस भेंट में मुख्यमंत्री ने लगभग १ घंटा समय देकर सद्गुरुद्वयी से विभिन्न विषयों पर चर्चा की । छत्तीसगढ की सांस्कृतिक धरोहर, वहां के प्राचीन मंदिर, ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक परंपरा, इन विषयों पर विचारमंथन हुआ । ‘सनातन संस्था जिसप्रकार से आध्यात्मिक शोधकार्य कर रही है तथा दौरे कर वस्तुओं का जतन कर उनका आध्यात्मिक महत्त्व आनेवाली पीढी को ज्ञात हो, इस पर शोधकार्य कर रही है । इसविषय में छत्तीसगढ सरकार की ओर से संपूर्ण सहयोग मिलेगा’, ऐसा आश्वासन मुख्यमंत्री ने दिया । इस भेंट के उपरांत श्री. प्रबल प्रतापसिंह जुदेव के साथ बात करते हुए मुख्यमंत्री ने स्वयं कहा, ‘‘इस भेंट से मुझे बहुत बडे स्तर पर सकारात्मक ऊर्जा मिली तथा यह भेंट बहुत अच्छी रही ।’’
मा. मुख्यमंत्री ने दोनों सद्गुरुद्वीय के संतत्व को पहचान कर उत्स्फूर्तता से छत्तीसगढ की पारंपरिक शॉल एवं सम्मानचिन्ह प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया ।
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रायपुर, छत्तीसगढ़ मे @SanatanSanstha के संस्थापक पूजनीय सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत बाळाजी आठवलेजी की आध्यात्मिक उत्तराधिकारी परमपूज्य श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाल एवं परमपूज्य श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजलि मुकुल गाडगिल के रायपुर आगमन पर उनका स्वागत एवं… pic.twitter.com/TxeACSmGap— Prabal Pratap Singh Judev (@prabaljudevBJP) July 22, 2026
५. श्री. प्रबल प्रतापसिंह जुदेव को सद्गुरुद्वयी के संबंध में प्राप्त अनुभूति
मुख्यमंत्री की भेंट के उपरांत श्री. प्रबल प्रतापसिंह जुदेव ने दूरभाष पर बताया, ‘‘मुख्यमंत्री की भेंट से पूर्व मैं बहुत थका हुआ था; परंतु इस भेंट के उपरांत हमें सद्गुरुद्वयी के माध्यम से प्रचंड स्तर पर आध्यात्मिक ऊर्जा मिली । उन्होंने इस दौरे की अवधि में ऐसे संतों का सान्निध्य प्राप्त होना हमारा परमसौभाग्य है ।’’
६. घरवापसी के महाअनुष्ठान हेतु सद्गुरुद्वयी को भावपूर्ण निमंत्रण ।
श्री. प्रबल प्रतापसिंह जुदेव ने छत्तीसगढ में सहस्रों हिन्दुओं की ‘घरवापसी’ (अन्य धर्म से हिन्दू धर्म में वापस लेना) की है । बस्तर एवं दंतेवाडा, इन स्थानों पर २ माह उपरांत घरवापसी के एक बडे कार्यक्रम का आयोजन किया गया है । उस कार्यक्रम के लिए उन्होंने सद्गुरुद्वयी को अत्यंत आदरपूर्वक आमंत्रित किया । ‘सद्गुरुद्वयी की पावन उपस्थिति में यह धर्मकार्य हो’, यह उनका भाव था ।
७. धर्मप्रेमियों एवं साधकों द्वारा अनुभव किया गया उच्च कोटि का भावसमारोह ।

छत्तीसगढ राज्य में पहली बार ही सनातन संस्था की सद्गुरुद्वयी एक ऐसा पहला दौरा आयोजित हुआ था । उसमें साधकों एवं धर्मप्रेमियों के लिए मार्गदर्शन का आयोजन किया गया था । यह मार्गदर्शन एक उच्च कोटि का ‘भावसमारोह’ ही सिद्ध हुआ । प्रत्येक धर्मप्रेमी अपनी मनोभावना व्यक्त करते समय श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी एवं श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी को ‘गुरुमाता’, इस भावपूर्ण शब्द से संबोधित कर रहा था । इस शब्द का उच्चारण करते ही सभी की भावजागृति हो रही थी । ‘हमें साक्षात् सद्गुरुमाता का एवं देवी का प्रत्यक्ष दर्शन प्राप्त हो रहा है तथा हम देवी के सामने ही आत्मनिवेदन कर रहे हैं’, इस भाव से सभी लोग खुलेमन से साधना, उसमें आनेवाली समस्याएं तथा अन्य प्रश्न पूछ रहे थे । इस कार्यंक्रम के २ दिन उपरांत तक सभी साधक एवं धर्मप्रेमी एक अलग ही भावावस्था में थे । ‘गुरुपूर्णिमा के पूर्व ही गुरुदेवजी ने हमें यह कृपा प्रसाद की बडी ऊर्जा प्रदान की’, इन शब्दों में सभी ने कृतज्ञता व्यक्त की ।
८. ‘छत्तीसगढ में धर्मकार्य के विस्तार का ईश्वरीय काल निकट आया है’, ऐसा श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी द्वारा बताया जाना ।
साधकों एवं धर्मप्रेमियों को मार्गदर्शन करते हुए श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी ने कहा, ‘‘यह दौरा संपूर्णतः ईश्वरीय नियोजन के अनुसार संपन्न हुआ है । छत्तीसगढ में बने नए साधक एवं धर्मप्रेमी तथा यहां का बढा हुआ हिन्दूसंगठन का कार्य देखते हुए ऐसा ध्यान में आता है कि यहां का धर्मकार्य व्यापक स्तर पर वृद्धिंगत होने के लिए ही ईश्वर ने यह समय सुनिश्चित किया है ।’’ उनके इस आशीर्वाद से छत्तीसगढ में एकप्रकार से धर्मकार्य का संकल्प ही लिया गया, ऐसा प्रतीत हुआ ।
‘यह संपूर्ण दौरा तो छत्तीसगढ की भूमि पर ईश्वर के चैतन्य की हुई महावर्षा ही थी’, इसके लिए हम सभी साधक एवं धर्मप्रेमी सद्गुरुद्वयी के चरणों में अनंत कोटि कृतज्ञता व्यक्त कर रहे हैं !
– श्री. सुनील घनवट, महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ राज्य संगठक, हिन्दू जनजागृति समिति (२४.७.२०२६)
पुरातत्व विभाग से संबंधित लोगों के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत करें ! – हिन्दुत्वनिष्ठों की मांग
वारकरियों को ‘घुसखोर’ (घुसपैठिया) कहकर अपमानित करने वालों का सार्वजनिक विरोध, एवं हिंदुत्वनिष्ठ संतों का भव्य सम्मान किया जाएगा ! – श्री सुनील घनवट, हिन्दू जनजागृति समिति
Uttarakhand Ghar Wapsi : उत्तराखंड में थारू समुदाय के ३६ परिवारों के १०६ लोगों ने हिन्दू धर्म में पुनरप्रवेश किया ।
साधकों को सूचना : सनातन संस्था के नाम से आने वाले फर्जी ई-मेल से सावधान रहें !
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !