सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश उज्ज्वल भुयान का सार्वजनिक कार्यक्रम में वक्तव्य !

भोपाल (मध्य प्रदेश) – गंगा नदी में नौका पर चिकन बिरयानी का सेवन करना अपराध नहीं है, तथा न ही यह अपराध हो सकता है; किन्तु ऐसा कृत्य करने वाले व्यक्तियों को बंदी बनाया गया तथा उन्हें ३ मास कारागार में व्यतीत करने पडे, ऐसा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश उज्ज्वल भुयान ने यहां कहा । वे यहां के ‘नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी’ में न्यायाधीश जी. पी. सिंह के चतुर्थ स्मृति व्याख्यान में संबोधित कर रहे थे ।
न्यायाधीश भुयान ने आगे कहा कि:
१. अपने विचारों की अभिव्यक्ति करना तथा शांतिपूर्ण आंदोलन करना नागरिकों के मूलभूत स्वतंत्रता के अंतर्गत आता है । वाद-विवाद लोकतंत्र की आत्मा है; किन्तु सम्प्रति सामान्य विषयों को भी आपराधिक स्वरूप प्रदान कर दिया जाता है ।
२. पर्यावरण के विनाश के विरुद्ध आंदोलन करने वालों को अपराधियों की भांति निष्कासित कर दिया जाता है । महाविद्यालय के प्रांगण में ही आंदोलन करने वाले छात्रों को बंदी बना लिया जाता है ।
३. न्यायालय संवेदनशील हैं तथा जामीन (जमानत) स्वीकृत भी करते हैं; किन्तु प्रायः इसमें विलंब हो जाता है । जमानत प्रदान करते समय जो कठोर शर्तें आरोपित की जाती हैं, वे चिंता का विषय हैं । क्या ऐसे आदेशों के माध्यम से न्यायालयों द्वारा नागरिकों को प्रदर्शन न करने का संदेश दिया जा रहा है ?
४. ‘बुलडोजर न्याय’ के विरुद्ध वर्ष २०२४ का सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय स्वागतयोग्य था; किन्तु वह २ वर्ष के विलंब से आया ।
५. सेवानिवृत्ति के पश्चात् भूतपूर्व न्यायाधीशों की राजनीति में प्रवेश करने की प्रवृत्ति पर टिप्पणी करते हुए न्यायाधीश भुयान ने कहा कि इसमें वैचारिक दोष निहित है ।
निर्णय की आलोचना का अर्थ न्यायाधीश की आलोचना नहीं ! – न्यायाधीश भुयान
छात्रों से न्यायपालिका जैसी संस्थाओं पर प्रश्न उठाने का आह्वान न्यायाधीश भुयान ने किया । उन्होंने कहा कि न्यायालय के निर्णयों का परीक्षण किया जाना चाहिए तथा आवश्यकता होने पर उसकी आलोचना भी की जानी चाहिए । किसी निर्णय की आलोचना करने का अर्थ न्यायाधीश की व्यक्तिगत आलोचना कदापि नहीं है, ऐसा भी भुयान ने स्पष्ट किया ।
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