ज्ञानोबा-तुकाराम के जयघोषों के साथ मान्य पालखियों सहित लाखों वारकरी पुणे नगर में पहुंचे !
वारी में हाथ में छडी टेककर चलनेवाले वृद्ध, सिर पर बोझ लेकर चलनेवाले वारकरी, थक जाने पर कंधे पर बैठे छोटे बच्चे, बीच-बीच में आनेवाली वर्षा एवं तीव्र धूप – इन सभी कठिनाइयों के पश्चात भी अनेक किलोमीटर की यात्रा करके वारकरियों में उत्साह अविचलित था ।