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पुणे, २० जून (वार्ता) – ‘ज्ञानोबा-तुकाराम’, ‘राम कृष्ण हरी’, ‘विठ्ठल-विठ्ठल’ इस प्रकार के अविरत नामस्मरण के साथ, धूप और वर्षा सहन करते हुए लाखों वारकरियों ने पंढरपुर की ओर मार्गक्रमण किया । देहू से प्रस्थान करनेवाली जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज की पालखी तथा आलंदी से प्रस्थान करनेवाली संतश्रेष्ठ श्री ज्ञानेश्वर माऊली की पालखी, ये दोनों मान्य पालखियां तथा इनके साथ चलनेवाले लाखों वारकरियों का भक्तिसागर २० जून की सायं पुणे नगर पहुंचा । २० जून की रात्रि तथा २१ जून का दिवस तथा रात्रि पुणे में विश्राम कर ये दोनों पालखियां २२ जून की प्रातः पंढरपुर की दिशा में प्रस्थान करेंगी ।
श्री संत ज्ञानेश्वर माऊली की पालखी ने २० जून की दोपहर संगमवाडी में विश्राम किया तथा सायं पुणे के भवानी पेठ में पहुंची । श्री संत तुकाराम महाराज की पालखी ने २० जून को दापोडी में विश्राम किया तथा सायं पुणे के नाना पेठ स्थित श्री निवडुंगा विठ्ठल मंदिर में निवास के लिए पहुंची । ये दोनों पालखियां २१ जून की रात्रि भी वहीं निवास करेंगी ।
अनेक किलोमीटर की यात्रा के पश्चात भी वारकरियों में उत्साह और संतोष !
वारी में हाथ में छडी टेककर चलनेवाले वृद्ध, सिर पर बोझ लेकर चलनेवाले वारकरी, थक जाने पर कंधे पर बैठे छोटे बच्चे, बीच-बीच में आनेवाली वर्षा एवं तीव्र धूप – इन सभी कठिनाइयों के पश्चात भी अनेक किलोमीटर की यात्रा करने पर भी वारकरियों में उत्साह अविचलित था । वारकरियों के मुखमंडल पर वारी का आनंद तथा संतोष स्पष्ट दिखाई देता था ।

ताल-मृदंग के साथ हरिनाम का गजर !
हाथों में ताल, गले में मृदंग धारण कर तथा मुख से श्री विठ्ठल के भजन गाते हुए वारकरियों की सैंकडों टोलियां संतश्रेष्ठ ज्ञानेश्वर माऊली तथा जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज की दिंडियों में सहभागी हुई थीं । प्रत्येक टोली के प्रारंभ में कुछ वारकरी हाथ में भगवा ध्वज लिए आगे चल रहे थे । उनके पीछे सिर पर तुलसी-वृंदावन लिए हुए सुहासिनी (सुहागिनी स्त्रियां) चल रही थीं । अनेक दिंडियों में मृदंग के साथ वीणा, चिपलियां लेकर वारकरी पारंपरिक भजन गाते हुए श्री विठ्ठल के नाम का जयघोष करते हुए आगे बढ रहे थे ।
🔱 Massive Youth Participation in the Ashadhi Wari to Pandharpur!
Sanatan Prabhat spoke to young Warkaris en route —
🗣️ “We receive immense positive energy!”
🕉️ “Wari is about devotion, discipline & spiritual awakening!”A new generation rising, rooted in Dharma 🇮🇳… pic.twitter.com/83WLrOizuz
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) June 20, 2025
वारी की प्रमुख घटनाएं :
१. दिंडियों के साथ चलनेवाले वारकरियों के सामान के लिए ट्रक अथवा टेंपो जैसे वाहन उपलब्ध थे ; परंतु जिनके पास कोई वाहन व्यवस्था नहीं थी, वे वारकरी सिर पर सामान लेकर ही मार्गक्रमण कर रहे थे ।
२. प्रत्येक वारकरी के ललाट पर गंध (टीका) था तथा अनेक वारकरियों ने सिर पर टोपी अथवा पारंपरिक वारकरी पगडी धारण की हुई थी ।
३. कुछ वारकरियों ने भारतीय सेना की ‘सिंदूर’ नामक प्रतिउत्तरात्मक अभियान के नाम की टोपी पहनी थी, तो कुछ ने लोकप्रतिनिधियों के नाम की टोपी पहन रखी थी ।
४. वारी मार्ग पर थोड़ी थोड़ी दूर पर विभिन्न लोकप्रतिनिधियों, स्थानीय सेवा संगठनों तथा वारकरियों द्वारा पानी, केले, बिस्कुट, नाश्ता, भोजन इत्यादि का वितरण किया जा रहा था ।
५. वारी मार्ग के अनेक घरों में महिलाएं प्रसाधनगृह का उपयोग कर सकें, इसकी विशेष व्यवस्था की गई थी ।
६. वारी में कुछ सेवाभावी मंडलों द्वारा निःशुल्क केशकर्तन (बाल कटवाने) की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही थी ।
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