Sanatan Sanstha Defamation Notice : सनातन संस्था की ओर से पृथ्वीराज चव्हाण को मानभंग का नोटिस !

कुछ दिन पूर्व ही न्यायालय से वर्ष २००८ में हुए मालेगांव बमविस्फोट प्रकरण का निर्णय आया । इस निर्णय के कारण ‘भगवा आतंकवाद’ कहने के कांग्रेसी षड्यंत्र की पोल खुल गई ।

Prithviraj Chavan On Sanatan Sanstha : हिन्दूविरोधी पृथ्वीराज चव्हाण ने सनातन संस्था को ‘आतंकवादी’ कहा !

हिन्दुओं के मूल अस्तित्व पर आघात करनेवाले जिहादी आतंकवादियों के समान ही, हिन्दुओं के तेज एवं मान को कलंकित करनेवाले चव्हाण जैसे वैचारिक आतंकवादी हिन्दू समाज के लिए अत्यंत घातक हैं ।

“सनातन संस्था से क्षमा याचना करें, अन्यथा हम वैधानिक कार्रवाई करेंगे !” – सनातन संस्था

सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस ने कहा कि, कांग्रेस के नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने सनातन संस्था को ‘आतंकवादी’ कहकर बार-बार उसका लक्ष्यीकरण किया है ।

सनातन की निर्दोषिता एवं पाक का छद्म एक ही तराजू में तोलना ‘द गोवन’ का बौद्धिक दिवालियापन !

गोवा के कुछ प्रसार माध्यमों ने इसकी आलोचना कर सनातनद्वेष की खुजली से आराम पा लिया । गोवा के ‘द गोवन’ इस अंग्रेजी समाचारपत्र ने १८ मई के संपादकीय में सनातन संस्था की आलोचना की है । उसका खंडन यहां दिया है ।

सामाजिक कार्य में योगदान देनेवाले एवं आधुनिकतावादियों द्वारा हिन्दुत्वनिष्ठों को फंसाने हेतु रचे गए षड्यंत्र को उजागर करनेवाले सुप्रसिद्ध सर्जन डॉ. अमित थढानी !

डॉ. अमित थढानी गत २५ वर्षाें से मुंबई तथा नई मुंबई में व्यवसाय करनेवाले प्रसिद्ध ‘जनरल सर्जन’ (शल्यविशारद) हैं । वे ‘इंडियन मेडिकल एसोसिएशन’ के चेंबूर शाखा के भूतपूर्व अध्यक्ष तथा डॉक्टरों की संस्थाओं के प्रमुख सदस्य हैं ।

Don’t Hate Sanatan Sanstha : सनातन संस्था से द्वेष करने की अपेक्षा उसका कार्य देखिए ! – बिजलीमंत्री सुदिन ढवळीकर

तथाकथित आधुनिकतावादी जवाहर बर्वे सनातन संस्था के विरुद्ध बरगलाए ! बर्वे द्वारा पुनः आलोचना करना आरंभ करते ही श्री. ढवळीकर कार्यक्रम छोडकर चले गए ! पणजी – ‘समाजोन्नति संगठन’ की ओर से पणजी के मिनेजिस ब्रागांजा सभागार में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में तथाकथित आधुनिकतावादी तथा सनातनद्वेषी जवाहर बर्वे … Read more

Dabholkar Murder Case Verdict : (और इनकी सुनिए…) ‘डॉ. दाभोलकर की हत्या के पीछे सनातन का हाथ है !’ – मिलिंद देशमुख, अनिस राज्य कार्यकारी सदस्य

२०१६ से मैं दाभोलकर हत्या मामले पर ध्यान रख रहा हूं। ज इस प्रसंग का परिणाम आया । वास्तव में जिन लोगों ने मारी थी, उन्हें दंड मिला, जबकि साक्ष्य (सबूतों) के अभाव में तीन लोगों को रिहा कर दिया गया है ।