Sanatan Sanstha Defamation Notice : सनातन संस्था की ओर से पृथ्वीराज चव्हाण को मानभंग का नोटिस !

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण द्वारा सनातन संस्था को ‘आतंकवादी संगठन’ कहे जाने का प्रकरण

पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण तथा सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री अभय वर्तक

मुंबई – कुछ दिन पूर्व ही न्यायालय से वर्ष २००८ में मालेगांव बमविस्फोट प्रकरण का निर्णय आया । इस निर्णय के कारण ‘भगवा आतंकवाद’ के कांग्रेसी षड्यंत्र की पोल खुल गई । उसके उपरांत कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने ‘भगवा दहशतवाद’ न कहिए, अपितु ‘सनातनी दहशतवाद कहिए’, ऐसा बोलते हुए सनातन धर्म की आलोचना की । हिन्दुत्वनिष्ठों द्वारा इसका विरोध किए जाने पर लीपा-पोती करते हुए उन्होंने ’मैंने सनातन धर्म को नहीं, अपितु सनातन संस्था को ‘आतंकवादी संगठन कहा’, यह स्पष्टीकरण दिया । उनका यह वक्तव्य झूठा, आधारहीन तथा दिशाभ्रम करनेवाला है; इसलिए सनातन संस्था के न्यासी श्री. वीरेंद्र मराठे की ओर से पृथ्वीराज चव्हाण को अधिवक्ता के माध्यम से १० करोड रुपए का मानभंग का नोटिस भेजा गया है । उसीप्रकार पृथ्वीराज चव्हाण बिनाशर्त सनातन संस्था से क्षमा मांगें, अन्यथा आगे की कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहे, ऐसी चेतावनी सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री. अभय वर्तक ने दी है ।



इन नोटिस में पृथ्वीराज चव्हाण १५ दिन के अंदर लिखितरूप से क्षमा मांगें, इस वक्तव्य के संबंध में मूल भेंटवार्ता में जितना लेखन किया गया है, उतना ही लेखन कर वह क्षमायाचना प्रकाशित करें, भविष्य में सनातन संस्था के विषय में किसी भी प्रकार का अपकीर्तिजनक वक्तव्य न किया जाए तथा १० सहस्र रुपए कानूनी हानिभरपाई दें, ये मांगें की गई हैं । संस्था के मानद कानूनी सलाहकार तथा मुंबई उच्च न्यायालय के अधिवक्ता रामदास केसरकर ने इस नोटिस में कहा है कि पृथ्वीराज चव्हाण के इस वक्तव्य के कारण सनातन संस्था की छवि धूमिल हुई है तथा सहस्रों साधकों की भावनाएं आहत हुई हैं । यह नोटिस प्राप्त होकर भी उन्होंने इसका उत्तर नहीं दिया, तो उनके विरुद्ध आपराधिक तथा दिवानी अभियोग प्रविष्ट किए जाएंगे ।

इस विषय में और जानकारी देते हुए श्री. अभय वर्तक ने कहा,

‘‘पृथ्वीराज चव्हाण आज यह बोल रहे हैं कि ‘भगवा’ महाराष्ट्र की मराठी संस्कृति का, छत्रपति शिवाजी महाराज का, संत ज्ञानेश्वर से लेकर सभी संतों एवं वारकरियों का ‘पवित्र भगवा’ है; इसलिए कोई ‘भगवा आतंकवाद’, ऐसा न कहें । उन्होंने उस प्रकार से कांग्रेसी नेताओं से भी यह आवाहन किया है; परंतु जब मालेगांव बमविस्फोट की घटना हुई, उस समय कांग्रेस के पी. चिदंबरम्, दिग्विजय सिंह, सुशीलकुमार शिंदे आदि नेताओं ने खुलेआम इसे ‘भगवा आतंकवाद’ कहते हुए हिन्दुओं को लक्ष्य बनाया । क्या उस समय यह ‘भगवा’ छत्रपति शिवाजी महाराज का तथा संतों का है, यह बात उनके ध्यान में नहीं आई ? क्या वे इतने वर्षाें तक सोए हुए थे ?’