सुधार के नाम पर धार्मिक स्वतंत्रता उल्लंघन नहीं किया जा सकता !
सामाजिक सुधारों के नाम पर धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं किया जा सकता । संविधान के निर्माताओं ने समाज की आवश्यकताओं के अनुसार जो प्रावधान निर्मित किए हैं, उन्हें ९ न्यायाधीशों की पीठ परिवर्तित नहीं कर सकती ।