Shankhnad Mahotsav Delhi : सनातन राष्ट्र की निर्मिति हेतु ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद’ महोत्सव में सहभागी हों ! – संजय शेठ, केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री
देहली में गूंजेगा सनातन राष्ट्र का शंखनाद !
रांची में पत्रकार वार्ता
देहली में गूंजेगा सनातन राष्ट्र का शंखनाद !
रांची में पत्रकार वार्ता
इस महोत्सव में भारत की सुरक्षा की दृष्टि से नक्सलवाद एवं आतंकवाद जैसी समस्याओं पर मार्गदर्शन तथा सनातन संस्कृति के संरक्षण तथा संवर्धन विषयों पर विविध क्षेत्र के मान्यवर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे ।
युवाओं के संस्कार, सामाजिक विकृतियां और विश्वयुद्ध के संकट के विषय में मार्गदर्शन
मनुष्य योनि सर्व योनियों में सर्वोच्च है । मनुष्य योनि में जन्म लेने के उपरांत व्यक्ति के इस जन्म का उद्देश्य क्या है ? तथा उसे वह कैसे साध्य करे, यह प्रश्न निर्माण होने पर ही मनुष्य के जन्म की यात्रा आरंभ होती है ।
इस कार्यक्रम में हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सदगुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी ने उपस्थित लोगों को मार्गदर्शन करते हुए कहा कि ‘‘आज की युवा पीढी को नैरेटिव में फंसाया गया है, उन्हें मन से पाश्चात्य बनाया है ।
सद्गुरु पिंगळेजी सदैव कहते रहते हैं, ‘मैं एक कठपुतली हूं तथा मेरे माध्यम से बोलनेवाले मेरे गुरुदेवजी ही हैं ।
गुरुपूर्णिमा महोत्सव मेंं सद्गुरु नीलेश सिंगबाळजी ने श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते हुए कहा, ‘‘महाभारत के समय भगवान श्रीकृष्ण ने बताया कि अधर्म के विरुद्ध संघर्ष करना ही धर्म है । गुरुतत्त्व को यही अपेक्षित है कि हिन्दू साधना कर आत्मिक बल बढाएं और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाएं ।
सनातन संस्था की ओर से १७ से १९ मई २०२५ की अवधि में फोंडा, गोवा में संपन्न ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ में हिन्दू धर्म एवं राष्ट्र रक्षा हेतु विशेष कार्य करनेवालों को ‘हिन्दू राष्ट्र रत्न’ तथा ‘सनातन धर्मश्री’ पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की गई थी ।
शंकराचार्यजी ने आगे कहा कि किस भी समाज के विकास के लिए संपूर्णतया सरकार पर निर्भर रहना उचित नहीं है । यदि सनातन धर्म टिका रहा, तो मनुष्य का कल्याण होगा, विश्व में शांति आएगी तथा भारत पुनः विश्व नेता बनेगा ।
यदि काश्मीरी हिन्दुओं का पुनर्वसन सम्पन्न हुआ, तो ही बंगाल, केरल जैसे राज्यों में हिन्दुओं का अस्तित्व सुरक्षित रह सकेगा, ऐसा संदेश इससे दिया जा सकता है । अन्यथा, कश्मीर की भांति, आनेवाले कुछ दशकों में ये राज्य भी हिन्दुओं के, अर्थात भारत के हाथों से निकल जाएंगे — इस कटु सत्य को स्वीकार करें !