मणिपुर में हिंसा अनायास घटित नहीं हो रही है बल्कि निर्माण की जा रही है ! – प. पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत
वह यहां संघ के विजयादशमी समारोह में बोल रहे थे । इस अवसर पर प्रसिद्ध गायक शंकर महादेवन मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित थे ।
वह यहां संघ के विजयादशमी समारोह में बोल रहे थे । इस अवसर पर प्रसिद्ध गायक शंकर महादेवन मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित थे ।
झारखंड मुक्ति मोर्चा विधायक सीता सोरेन के विरुद्ध एक प्रकरण की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी की ।
सर्वाेच्च न्यायालय ने केंद्रसरकार, मध्यप्रदेश और राजस्थान सरकार को भेजी कानूनी नोटिस !
रशिया के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन (Vladimir Putin) ने पुनः एक बार की प्रधानमंत्री मोदीजी की प्रशंसा !
इसके लिए प्रथम कनाडा को उसके देश में रहने वाले खालिस्तानी आतंकवादियों को भारत को सौंपना चाहिए । साथ ही वहां चल रही खालिस्तानी मुहिम को निष्फल करना चाहिए । ये दोनों बातें ट्रूडो के न कर सकने के कारण कनाडा के अधिकारियों को निकालना आवश्यक ही है !
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो की भारतद्वेषी एवं खालिस्तान प्रेमी मानसिकता जबतक नष्ट नहीं होती, तबतक यह कहना ही उचित होगा कि कनाडा से किसी भी प्रकार की अपेक्षा करना व्यर्थ है !
यह सर्वविदित है कि द्रमुक सनातन द्वेषी है तथा इसका जन्म ही सनातन द्वेष की भावना से हुआ है | इसमें कोई संदेह नहीं कि आगामी चुनाव में सनातन धर्मावलंबी ऐसे गठबंधन को राजनीतिक रूप से नष्ट कर देंगे ! यह एक बार पुन: सिद्ध हो जाएगा कि जो लोग सनातन को नष्ट करने की वार्ता करते हैं वे स्वयं ही समाप्त हो जाते हैं !
वर्ष २०२१ में चंद्राबाबू नायडू के विरुद्ध कौशल्य विकास घोटाले पर अपराध प्रविष्ट किया गया था । २५० करोड रुपए के घोटाले में चंद्राबाबू प्रथम क्रमांक के अपराधी हैं । उन पर लगाई गई धाराएं जमानत के योग्य नहीं (नॉन बेलेबल) हैं ।
पाकिस्तान में अभी भी वंश एवं कुल पर आधारित राजनीति का स्वरूप निश्चित होता है । ऐसे देश की जनता अन्न के बिना त्रस्त हो, तो भी वहां के राजनीतिक जनप्रतिनिधियों को उससे लेना-देना नहीं रहता । इमरान खान के दण्ड के उपरांत पाकिस्तान में एक नया अध्याय आरंभ होगा; किंतु वह प्रतिशोध, द्वेष तथा दुर्भावना का होगा ।
अधिवेशन आरंभ होने के पूर्व ही ‘शासन को किन सूत्रों पर घेरना है ?’, यह वे पहले ही निश्चित कर लेते हैं तथा वे ऐसा करते भी हैं । इसलिए यह अधिवेशन ‘सरकार को दुविधा में डालने के लिए है अथवा जनता की समस्याओं का समाधान करने के लिए ?’, यह प्रश्न उठता है ।