तुम्हारे पास वर्दी है, इसलिए क्या आप कुछ भी कर सकते हैं ? – Karnataka High Court

अवैध रूप से बंदी बनाने पर कर्नाटक उच्च न्यायालय ने पुलिस को डांट लगाई ।

बेंगलुरू (कर्नाटक) – हम कानून को साख पर बिठाकर कुछ भी कर सकते हैं, क्या ऐसा पुलिस को लगता है ? किसी व्यक्ति को कारागृह भेजने को क्या आपने खेल समझ रखा है ? यदि किसी ने अपराध किया हो तो आप कानून के अनुसार निश्चित ही उसे कारागृह भेजिए, इन शब्दों में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कानूनी नियमों का पालन न कर अवैध रूप से बंदी बनाने वाले पुलिस अधिकारियों को फटकार लगाई । न्यायालय ने पत्नी की शिकायत पर प्रविष्ट किए गए धोखाधडी के अपराध में बंदी बनाए गए व्यक्ति को तत्काल छोडने का आदेश दिया तथा बंगलुरू पुलिस थाने से संबंधित अन्वेषण अधिकारियों के विरुद्ध मंडलस्तर की जांच का आदेश दिया ।

शिकायतकर्ता के पति को इतनी शीघ्रता से बंदी क्यों बनाया ?

न्यायालय ने यह प्रश्न किया कि धोखाधडी के प्रकरण में शिकायतकर्ता के पति को इतनी शीघ्रता से बंदी क्यों बनाया ? क्या पत्नी द्वारा शिकायत देते ही पति को कारागृह भेजना चाहिए ? धोखाधडी के प्रकरण में क्या आप उसे कारागृह भेज सकते हैं ? पति-पत्नी के संबंधों में धोखाधडी किए जाने का आरोप है, तो केवल पति ही पुलिस की पकड (हिरासत) में क्यों है ?

पुलिस थाने के नए प्रमुख ने प्रकरण में अधिक रूचि दिखाई ।

न्यायालय को यह ज्ञात हुआ कि पहले के अन्वेषण अधिकारी ने इस प्रकरण में ३ माह से अधिक समय तक कोई भी विशेष जांच नहीं की थी, परंतु उसके उपरांत पुलिस थाने के नए प्रमुख ने पदभार ग्रहण किया तथा उसने इस प्रकरण में अधिक रूचि दिखाई । इस अधिकारी ने आरोपी को उपस्थित रहने का नोटिस दिया तथा जांच में सहयोग न करने का आरोप लगाते हुए अपराध पंजीकृत करने के ४ माह की अधिक अवधि तक उसे कारागृह में रखा । सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार यह स्पष्ट है कि बंदी बनाया जाना अंतिम विकल्प होना चाहिए, विशेष कर जिन अपराधों में ७ वर्ष अथवा उससे अल्प अवधि के दंड का प्रावधान है ।

क्या है यह प्रकरण ?

संबंधित अपराध १९ दिसंबर २०२५ को प्रविष्ट किया गया था । पति ने पत्नी की झूठे हस्ताक्षर कर भागीदारी का अनुबंध (पार्टनरशिप डीड) बनाया तथा उसके अज्ञातवश बैंक में ‘करंट एकाऊंट’ खोला, यह आरोप था । अपराध प्रविष्ट होने के ३ माह से अधिक अवधि तक कोई भी ठोस जांच नहीं हुई,परंतु उसके उपरांत अकस्मात ही आरोपी को बंदी बनाया गया ।