भाजपा सरकार ने मध्याह्न भोजन आपूर्ति का अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) दिया है ‘इस्कॉन’ को
बंगाल पर शाकाहारी संस्कृति थोपी जाने का विपक्षी दलों का आरोप
कोलकाता (बंगाल) – ‘’ आध्यात्मिक संस्था ‘इस्कॉन’ द्वारा स्कूली विद्यार्थियों के मध्याह्न भोजन से अंडा हटाने से बंगाल में विवाद निर्माण हो गया है । विपक्षी दलों ने ‘भाजपा बंगाल में शाकाहारी संस्कृति थोपने का प्रयास कर रही है’, ऐसा आरोप लगाया । कोलकाता महानगरपालिका क्षेत्र के स्कूलों में मध्याह्न भोजन तैयार करने का अनुबंध ‘इस्कॉन’ को देने का निर्णय राज्य की नई भाजपा सरकार ने लिया । इसी कारण से अंडा देना बंद होनेवाला है । अंडे के विकल्प में अब पनीर, राजमा, सोयाबीन और दुग्धजन्य पदार्थ (डेयरी उत्पाद) जैसे शाकाहारी विकल्प दिए जानेवाले हैं ।
विपक्षियों के दावे !
विपक्ष के नेता ऋतुब्रत बनर्जी ने अंडा प्रतिबंध पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बंगाली बच्चे पीढियों से प्राणिजन्य प्रोटीन (एनिमल प्रोटीन) खाकर बडे हुए हैं, इसलिए पोषण योजना स्थानीय खाद्य संस्कृति के अनुसार ही होनी चाहिए । तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने भी सरकार पर कल्याणकारी योजना के माध्यम से शाकाहार थोपने का आरोप लगाया है ।
सरकार का दावा
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण और स्वच्छ भोजन सुनिश्चित करना ही इसके पीछे का मुख्य उद्देश्य है । किसी पर भी धार्मिक श्रद्धा नहीं थोपी जा रही है । स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने बताया कि पोषण वैज्ञानिक मानदंडों पर निश्चित होना चाहिए, भोजन में अंडा है अथवा नहीं ? इससे नहीं ।
शाकाहारी भोजन बंगाल के लिए नया नहीं ! – इस्कॉन का मत
इस्कॉन के कोलकाता उपाध्यक्ष राधारमण दास ने कहा कि संस्था पहले से ही देश के विभिन्न राज्यों में १२ लाख विद्यार्थियों को भोजन आपूर्ति करती है । बंगाल में मानी जानेवाली ‘गौडीय वैष्णव’ परंपरा भी इसी मिट्टी की होने के कारण शाकाहारी भोजन बंगाल के लिए नया नहीं है, साथ ही दालों और सोयाबीन से भी आवश्यक प्रोटीन मिलता है ।

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