Church of Scotland Trust : फोर्ट (मुंबई) स्थित शासकीय भूमि के प्रकरण में जिलाधिकारी द्वारा चर्च को बकाया धन की वसूली की सूचना (नोटिस) !

  • हिन्दू विधिज्ञ परिषद की शिकायत के पश्चात प्रशासन की कार्रवाई I

  • २१ दिनों में धनराशि जमा न करने पर वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी l

मुंबई – यहां के फोर्ट क्षेत्र की शासकीय भूमि को ‘द चर्च ऑफ स्कॉटलंड ट्रस्ट’ ने विगत ३३ वर्षों से अनधिकृत रूप से अपने आधिपत्य में रखा है । इस प्रकरण में मुंबई नगर जिलाधिकारी कार्यालय ने चर्च को थकाऊ वसूली की अंतिम सूचना जारी की है ।

भू-क्रमांक १४०५ की ११३७.३२ वर्ग मीटर भूमि का अनधिकृत उपयोग करने के अपराध में ‘द चर्च ऑफ स्कॉटलंड ट्रस्ट’ को ३१ लाख ७४ सहस्र ८९५ रुपये की थकाऊ वसूली की अंतिम सूचना दी गई है । आगामी २१ दिनों में यह धनराशि शासकीय कोष में जमा न करने पर वैधानिक कार्रवाई करने की चेतावनी प्रशासन ने दी है ।

यहां की शासकीय भूमि १८ जून १८९४ के दिन ‘फ्री चर्च ऑफ स्कॉटलंड’ नामक संस्था को ९९ वर्षों के पट्टे (लीज) पर दी गई थी । इस पट्टे की अवधि १३ जून १९९३ के दिन ही समाप्त हो चुकी है ; परंतु अवधि समाप्त होने के ३३ वर्ष व्यतीत होने पर भी शासन ने इस भूमि को अपने अधिकार में नहीं लिया था तथा न ही पट्टे का नवीनीकरण किया था ।

हिन्दू विधिज्ञ परिषद का संघर्ष

हिन्दू विधिज्ञ परिषद ने इस गंभीर प्रकरण का संज्ञान लेते हुए राजस्व विभाग के समक्ष लिखित शिकायत प्रविष्ट की थी । मूल पट्टाधारक संस्था अब अस्तित्व में नहीं है तथा ‘चर्च ऑफ सेंट एंड्र्यू एंड सेंट कोलुंबा’ नामक संस्था किसी भी अधिकृत वैधानिक हस्तांतरण के बिना इस बहुमूल्य भूमि का अनधिकृत उपभोग कर रही है ।

जिलाधिकारी द्वारा २१ दिनों की मर्यादा

इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए मुंबई नगर जिलाधिकारी कार्यालय ने २३ जून २०२६ के दिन संबंधित ट्रस्ट को नवीन सूचना प्रेषित की है । ३ जनवरी २०२२ के आदेशानुसार पट्टा नवीनीकरण के लिए ३१ लाख ७४ सहस्र ८९५ रुपये शासन के खाते में जमा करना अनिवार्य था । अब निवासी उप-जिलाधिकारी ने २३ जून के पत्र द्वारा संबंधित संस्था को २१ दिनों की अंतिम अवधि दी है ।

नियत अवधि में बकाया धनराशि (GRAS-जी.आर.ए.एस.) प्रणाली द्वारा जमा कर उसका अधिकृत चालान जिलाधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत न करने पर नियम के अनुसार आगामी कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी । शासकीय भूमि का अवैध उपयोग तथा राजस्व की हानि करने वाली संस्थाओं के विरुद्ध हिन्दू विधिज्ञ परिषद द्वारा किए गए संघर्ष को इस सूचना के कारण बडी सफलता प्राप्त हुई है ।

संपादकीय भूमिका

थकाऊ वसूली के विषय में शिकायत करने के पश्चात जागृत हुआ प्रशासन !