योगी तथा संन्यासी मुझसे अल्प आयु के रहेंगे, तो भी उनके पैर छूकर मैं आशीर्वाद लूंगा, यह मेरी आदत है !
हिन्दु धर्म परंपरानुसार वयोवृद्ध, ज्ञानवृद्ध, तपोवृद्ध आदि के पैर छूना तथा उनका आदर करना चाहिए । किंतु कोई भी उसका पालन नहीं करता । यदि कोई उसका पालन करता है, तो निधर्मीवादी, पुरो (अधो))गामी तथा धर्मद्रोहियों के पेट में दर्द होना स्वाभाविक बात है; किंतु रजनीकांत ने ऐसे लोगों को उनकी पात्रता उनके ही उत्तर में बता दी !