सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
‘कहां माता-पिता को निरुपयोगी मानकर वृद्ध आश्रम में भेजनेवाली पश्चिमी विचारधारा की वर्तमान पीढी और कहां ‘यह पूरा विश्व ही मेरा घर है’, ऐसा सिखानेवाली हिन्दू धर्म की अभी तक की पीढियां !’
‘कहां माता-पिता को निरुपयोगी मानकर वृद्ध आश्रम में भेजनेवाली पश्चिमी विचारधारा की वर्तमान पीढी और कहां ‘यह पूरा विश्व ही मेरा घर है’, ऐसा सिखानेवाली हिन्दू धर्म की अभी तक की पीढियां !’
श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी की विशेषता यह है कि वे ‘आज्ञापालन’, इस गुण से ओतप्रोत हैं, साथ ही उन्होंने ‘लगन’, ’साधकों के प्रति निरपेक्ष प्रीति, कार्यमग्नता एवं ईश्वर के साथ आंतरिक सान्निध्य’, इन गुणों के द्वारा साधकों की साधना के दायित्व का बडी सहजता से निर्वहन किया तथा आज भी कर रही हैं
हिन्दुओं का धर्मान्तरण करानेवालों को जन्मभर के लिए शिक्षा देने हेतु उत्तर प्रदेश सरकार को कठोर कदम उठाने चाहिए । ऐसा होने पर ही अन्य धर्मांधों को ऐसा दुस्साहस करने का साहस नहीं होगा ।
जापान यात्रामें प्रधानमंत्री मोदी का जापानी संस्थानों से आह्वान
वैश्विक विकास में भारतका १८ प्रतिशत योगदान ! – प्रधानमंत्री
‘केवल मुसलमान एवं ईसाईयों के धार्मिक स्थल ही नहीं, अपितु हिन्दुओं के धार्मिक स्थल भी इससे अछूते नहीं है’, यह सूत्र समाज के मन पर अंकित करने का प्रयास पूरे विश्व में चल रहा है । इसलिए इस षड्यंत्र का शिकार हुए बिना हिन्दुओं को सतर्क रहकर साम्यवादियों के इन वैचारिक आतंकियों के आघातों को विफल करना अब अनिवार्य हो गया है ।
इस डॉक्युमेंट्री फिल्म को अधिक से अधिक समाज तक पहुंचाने हेतु हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों को आगे आना चाहिए । डॉक्युमेंट्री फिल्म समाजजागृति का बहुत प्रभावी माध्यम है ।
सनातन के साधक श्री. रवींद्र गोंधळेकर (आयु ८० वर्ष) सनातन के १३४वें व्यष्टि संतपद पर, जबकि साधिका श्रीमती वर्षा भिडे (आयु ७३ वर्ष) के सनातन संस्था के १३५वें व्यष्टि संतपद पर विराजमान होने की घोषणा सनातन संस्था की धर्मप्रचारक सद्गुरु स्वाती खाडयेजी ने पुणे के एक अनौपचारिक समारोह में की ।
पिछले अंक में प्रकाशित लेख में आपने ‘नक्सलवाद की संकल्पना, शहरी नक्सलवादियों के लक्षण; भारत राष्ट्र को नष्ट करना, यह नक्सलवादियों का लक्ष्य और शहरी नक्सलवादियों के उदाहरणों’ के बारे में पढा । आज हम इस लेख का अंतिम भाग प्रस्तुत कर रहे हैं ।
इस अवसर पर सनातन संस्था की ओर से ग्रंथ प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसका लाभ वहां उपस्थित ७० से अधिक जिज्ञासुओं ने लिया ।
इस कार्यक्रम में हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सदगुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी ने उपस्थित लोगों को मार्गदर्शन करते हुए कहा कि ‘‘आज की युवा पीढी को नैरेटिव में फंसाया गया है, उन्हें मन से पाश्चात्य बनाया है ।