Naxalites Encounter : बीजापुर (छत्तीसगढ) में ५ नक्सलवादी मारे गए
४ दिनों में सैनिकों ने २१४ नक्सलवादी ठिकानों को किया ध्वस्त !
४ दिनों में सैनिकों ने २१४ नक्सलवादी ठिकानों को किया ध्वस्त !
‘गजवा-ए-हिन्द’ के जवाब के रूप में वैचारिक ‘गजवा-ए-इस्लाम’का आरंभ कीजिए ! -‘रॉ’के पूर्व अधिकारी आर्.एस्.एन्. सिंह (सेवानिवृत्त) का आवाहन
कांग्रेस ने लोकतंत्र को बचाया या रक्तरंजित राजनीति को जन्म दिया ?
असम के काकोपाथार क्षेत्र में १६ अक्टूबर की मध्यरात्रि को सेना शिविर पर ग्रेनेड (हाथबम) फेंका गया तथा लगभग एक घंटे तक लगातार गोलीबारी भी की गई ।
पिछले अंक में प्रकाशित लेख में आपने ‘नक्सलवाद की संकल्पना, शहरी नक्सलवादियों के लक्षण; भारत राष्ट्र को नष्ट करना, यह नक्सलवादियों का लक्ष्य और शहरी नक्सलवादियों के उदाहरणों’ के बारे में पढा । आज हम इस लेख का अंतिम भाग प्रस्तुत कर रहे हैं ।
यह मुठभेड मैनपुर पुलिस थाने के परिसर के पर्वतीय क्षेत्र में स्थित माटल में हुई ।
भामरागड तहसील के कुमरगुडा के नागरिकों ने नक्सलवादियों को गांव की सीमा में प्रवेश करने से प्रतिबंधित किया है । नक्सलवादियों का आतंक त्यागकर कुमरगुडा वासियों ने यह ऐतिहासिक निर्णय लिया ।
जून २०२५ में महाराष्ट्र के चंद्रपुर, भंडारा, नांदेड तथा यवतमाल — ये ४ जिले नक्सलवाद से मुक्त घोषित किए गए हैं । परंतु गोंदिया तथा गढचिरौली जिलों में अभी भी नक्सलवाद विद्यमान है ।
आज सबसे गंभीर और संभावित संकट बाहरी शत्रुओं से नहीं, अपितु शहरों के भीतर काम करनेवाले वैचारिक रूप से प्रेरित ‘राष्ट्रघातियों’ से आता है, जो सामान्यतया ‘बौद्धिक कार्यकर्ता’ तथा ‘व्यवसायी’ होते हैं ।
एक समय ऐसा था जब छत्तीसगढ के बस्तर का नाम आते ही नक्सलवाद, माओवाद, बमविस्फोट एवं बंदूकों की ध्वनि स्मरण होती थी । आज वही बस्तर नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है, तथा वहां के युवा अब ओलम्पिक में भाग ले रहे हैं ।