
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की ‘एक आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणी’
श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी का ५८ वां जन्मदिवस !

सर्वपित्री अमावस्या (२१.९.२०२५)
श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी के चरणों में भावपूर्ण वंदन !
‘‘वर्ष २००७ से शारीरिक बीमारियां एवं आध्यात्मिक कष्ट के कारण मेरी प्राणशक्ति क्षीण होने लगी । उसके कारण कक्ष से बाहर निकलना भी मेरे लिए असंभव हो गया । उस समय ‘अब साधकों की समस्याओं का समाधान कौन करेगा ?’, यह प्रश्न मेरे मन में उत्पन्न हुआ तथा तबसे श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी ने इस दायित्व का सक्षमता से निर्वहन करना आरंभ किया ।
अध्यात्म में ‘आज्ञापालन’, यह गुण अत्यंत महत्त्वपूर्ण है तथा वह सभी गुणों का राजा है । श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी की विशेषता यह है कि वे ‘आज्ञापालन’, इस गुण से ओतप्रोत हैं, साथ ही उन्होंने ‘लगन’, ’साधकों के प्रति निरपेक्ष प्रीति, कार्यमग्नता एवं ईश्वर के साथ आंतरिक सान्निध्य’, इन गुणों के द्वारा साधकों की साधना के दायित्व का बडी सहजता से निर्वहन किया तथा आज भी कर रही हैं । साधकों की साधना की समस्याओं का समाधान करते समय वे साधक को स्थूल से अचूक दृष्टिकोण देकर आधार देती ही हैं; परंतु उसके साथ ही उनके संकल्प एवं लगन के कारण साधक को भी सूक्ष्म से उसकी साधना की बाधाएं दूर होने की तथा उसे साधना की आगे की दिशा मिलने की अनुभूति होती है । इसका अर्थ अब उनका कार्य स्थूल एवं सूक्ष्म, इन दोनों स्तरों पर हो रहा है ।
‘प्रीति, नेतृत्व, नियोजन कुशलता एवं साधकों की आध्यात्मिक उन्नति हो; इसकी अखंड लगन होने के कारण वे तीव्र गति से साधकों को तैयार कर रही हैं । पिछले ८ वर्षों से वे सभी साधकों के लिए भक्तिसत्संग ले रही हैं । उनके चैतन्यमय सत्संग का अनेक साधकों को लाभ मिल रहा है तथा उन्हें आध्यात्मिक स्तर की अनुभूतियां हो रही हैं ।
‘चैतन्य के स्तर पर कैसे कार्य होता है’, इसका (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी एक सजीव उदाहरण हैं ।
वे सभी साधकों एवं संतों के लिए व्यष्टि एवं समष्टि साधना का आदर्श हैं । ऐसे सर्वांग से परिपूर्ण श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में उन्हें अनेक-अनेक शुभकामनाएं !’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
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