संपादकीय : धर्मस्थल में हिन्दूद्वेषियों का अधर्मी कृत्य !

मास्कमैन चिन्नय्या

कर्नाटक के सुप्रसिद्ध तीर्थक्षेत्र धर्मस्थल को अपकीर्त (बदनाम) करनेवालों की पोल खुल गई है । लगभग २ महिने पूर्व धर्मस्थल मंदिर में पहले कार्यरत चिन्नय्या नामक स्वच्छताकर्मी ने वहां के पुलिस थाने में जाकर वर्ष १९९८ से २०१४ की अवधि में उसने धर्मस्थल में १०० से अधिक महिलाओं तथा युवतियों के शवों को दफनाने का दावा किया । इसमें महत्त्वपूर्ण बात यह है कि उसने इन महिलाओं को मारने से पूर्व उनके साथ दुष्कर्म किए जाने की बात कहकर सनसनी फैला दी । ‘नेत्रावती नदी तट के परिसर में ऐसे १७ स्थान हैं, जहां मैंने उन शवों का दफनाया है’, ऐसा उसका कहना था । उसकी यह रोचक कहानी सुनकर पुलिस प्रशासन ने तुरंत ही इसकी जांच आरंभ की । यहां आप यह ध्यान में रखें कि जब कोई सामान्य हिन्दू उस पर किसी धर्मांध द्वारा अत्याचार होने की शिकायत लेकर पुलिस थाने में जाता है, तब पुलिस प्रशासन उसकी अनदेखी करता है, उसे पुलिस थाने में बिठा लिया जाता है अथवा अपमानित कर वापस भेज दिया जाता है । कभी-कभी पुलिस शिकायत देने आए पीडित हिन्दू पर ही अपराध पंजीकृत करती है, तो चिन्नय्या की बातों पर विश्वास करने की पुलिस की कर्तव्यनिष्ठा ऐसे अकस्मात कैसे जागृत हुई ? इसका उत्तर सरल था । चिन्नय्या का लक्ष्य धर्मस्थल का पवित्र मंजुनाथ मंदिर था । उस पर कर्नाटक में हिन्दूद्वेषी कांग्रेस सत्ता में है ! हिन्दूद्वेष की लालसा संतुष्ट करने के लिए कर्नाटक सरकार को बडी सहजता से यह विषय मिल गया । ‘हम इस प्रकरण की गहन जांच करेंगे’, ऐसी प्रतिज्ञा लेकर कांग्रेस सरकार ने इसकी जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया । उसके उपरांत २ महीने तक कर्नाटक में जो हिन्दूविरोधी खेल चला, उससे केवल कर्नाटक ही नहीं, अपितु पूरा देश हिल गया । चिन्नय्या जहां हाथ दिखाता था, वहां पुलिस बल खुदाई करते निकल पडता था । काले कपडे पहना हुआ तथा अपना पूरा चेहरा ढंकनेवाला चिन्नय्या प्रसारमाध्यमों में ‘मास्कमैन’ के नाम से बडा प्रसिद्ध हुआ । ‘आज चिन्नय्या पुलिसकर्मियों को साथ लेकर किस स्थान की खुदाई करने के लिए कहेगा ?’, इसे लोगों को दिखाने के लिए समाचार वाहिनियों के कैमरे सुसज्जित थे । इस खुदाई के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया, साथ ही कुछ स्थानों पर १८ फुट की गहराई तक खुदाई की गई । हिन्दुओं पर कीचड उछालने के लिए इच्छुक आधुनिकतावादियों तथा साम्यवादियों का गिरोह सक्रिय हो गया । सामाजिक माध्यमों पर अनेक वीडियो प्रसारित कर धर्मस्थल मंदिर को लक्ष्य बनाया गया । ‘महिलाएं दर्शन करने मंदिर आईं तथा दर्शन करने के उपरांत लापता हो गईं’, इस प्रकार के समाचार दिए जाने के कारण ‘मंदिर में निश्चितरूप से क्या चल रहा है ?’ वहां देवतादर्शन के नाम पर क्या चलता है ?’ जैसे प्रश्न उठाकर हिन्दुओं को भ्रमित करने का काम किया गया । इन सभी हिन्दूविरोधियों का लक्ष्य थे, इस देवस्थान के धर्माधिकारी वीरेंद्र हेगडे तथा उनका परिवार ! निरंतर २ महीने गला सूखने तक कंठशोष करने के उपरांत अंततः २ दिन पूर्व पुलिस का दिशाभ्रम करने के आरोप में चिन्नय्या को ही बंदी बनाया गया । धर्मस्थल में जब तक खुदाई चल रही थी, तब तक इस ‘मास्कमैन’ की पहचान उजागर नहीं की गई थी; परंतु उसे बंदी बनाए जाने के उपरांत उसके कारनामे सामने आ गए । चिन्नय्या जो जानकारी दे रहा था, उसमें जो विसंगतियां थीं, वह सामने आईं । पुलिस ने उसे खाकी वर्दी का दम दिखाया । इस प्रकरण को अप्रत्याशित मोड मिलने के उपरांत अब हिन्दूद्वेषी गिरोह में सन्नाटा फैल गया है । इसमें हिन्दूद्वेषियों का झूठ उजागर हुआ; परंतु हिन्दुओं के धार्मिक स्थल को अपकीर्त करने के कारण जो धर्महानि हुई, उसकी भरपाई कैसे की जा सकती है ?

पोलिस की जांच के विषय में संदेह !

जब भी किसी महत्त्वपूर्ण प्रकरण की जांच करने हेतु विशेष जांच दल का गठन किया जाता है, तब उसमें अनुभवी एवं सक्षम पुलिस अधिकारियों का समावेश किया जाता है । धर्मस्थल प्रकरण में पुलिस प्रशासन का उद्देश्य संदेहजनक लगा । ‘चिन्नय्या हमें भ्रमित कर रहा है, यह ध्यान में आने में पुलिस को इतना समय क्यों लगा ? चिन्नय्या कैसे झूठा है तथा वह पैसों के लिए कुछ भी कर सकता है, इस विषय में पुलिस ने चिन्नय्या की पहली पत्नी तथा ग्रामवासियों की बातों पर ध्यान देकर उसकी पृष्ठभूमि थोडी भी जांच ली होती, तो कुछ ही दिन में सच्चाई सामने आ जाती । पुलिस को यह समझ में आने में इतना समय क्यों लगा ? चिन्नय्या के दावे के उपरांत सुजाता भट नामक महिला का नाम सामने आया । इस वयस्क महिला ने उसकी बेटी अनन्या भट के वर्ष २००३ में धर्मस्थल से लापता होने की बात कही थी । इस महिला ने प्रसारमाध्यमों के सामने पिछले कुछ वर्षों से उसने किस प्रकार न्याय मांगने के लिए पुलिस थाने के चक्कर काटे, इसका रोना रोया । २ महीने पश्चात अनन्या भट नामक उसकी कोई बेटी ही नहीं है, यह सच्चाई सामने आई । देवस्थान के साथ भूमि संबंधी विवाद था, इसलिए प्रतिशोध लेने के लिए उसने यह झूठ फैलाया, इस बात को उसने स्वीकार किया । समाचारों के अनुसार सुजाता भट के कुछ शहरी नक्सलियों के साथ संबंध थे तथा कुछ वर्षों से पुलिस उसकी गतिविधियों पर ध्यान रखे हुई थी, ऐसी जानकारी सामने आ रही है । किसी व्यक्ति के लापता होने की शिकायत मिलने पर पहले ‘लापता व्यक्ति कौन था ? वह कहां काम करता था अथवा कहां शिक्षा ग्रहण कर रहा था ?’ आदि प्राथमिक स्तर की जांच की जाती है । यहां ‘अनन्या भट’ नामक किसी लडकी का अस्तित्व ही नहीं था, यह सामने आने में २ महीने क्यों लगे ? संक्षेप में कहा जाए, तो ये आरोप झूठे तथा आरोप लगानेवाले भी झूठे, यह स्थिति थी । जिन बातों का निर्णय कुछ दिन में हो सकता था, उसमें इतना समय क्यों लगा ? अथवा क्या इसमें जानबूझकर समय गंवाया गया ? हिन्दुओं के तीर्थस्थलों का जितना मानभंग करना संभव है, उतना मानभंग करना तथा उससे हिन्दुओं के मन में भ्रम फैलाकर उनकी श्रद्धा तोडना, इस खेल में क्या पुलिस भी लिप्त थी ?

माध्यमों पर कार्रवाई होना आवश्यक !

धर्मस्थल को अपकीर्त (बदनाम) करनेवालों में ‘द वायर’, ‘न्यूज मिनट’, साथ ही मलयालम एवं तमिल भाषा के प्रसारमाध्यम आगे थे । एम.डी. समीर नामक यूट्यूबर ने तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कर धर्मस्थल के झूठे वीडियो प्रसारित किए । ‘अल्-जजीरा’, ‘बीबीसी’, ‘द टेलिग्राफ’, ‘गार्डियन’ आदि अंतरराष्ट्रीय प्रसारमाध्यमों ने भी धर्मस्थल के सूत्र को आगे कर हिन्दुओं को लक्ष्य बनाया । अधिकांश चर्च एवं मस्जिद अनाचार के अड्डे बन जाने के समाचार विश्व में तथा भारत में भी सामने आए हैं । उसके कारण ‘केवल मुसलमान एवं ईसाईयों के धार्मिक स्थल ही नहीं, अपितु हिन्दुओं के धार्मिक स्थल भी इससे अछूते नहीं है’, यह सूत्र समाज के मन पर अंकित करने का प्रयास पूरे विश्व में चल रहा है । इसलिए इस षड्यंत्र का शिकार हुए बिना हिन्दुओं को सतर्क रहकर साम्यवादियों के इन वैचारिक आतंकियों के आघातों को विफल करना अब अनिवार्य हो गया है ।